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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 10 मार्च। छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा ब्लैक लिस्ट किए गए फर्मों को उस वक्त झटका लगा, जब हाईकोर्ट ने इन फर्मों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने इस पूरे मामले में राज्य शासन और पाठ्य पुस्तक निगम से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।
जस्टिस गौतम भादुड़ी की एकल पीठ ने प्रकरण की सुनवाई की। पाठ्य पुस्तक निगम ने जिन पांच फर्मों को ब्लैक लिस्ट किया था। उनमें से दो शारदा ऑफसेट और टेक्नो प्रिंटर्स ने याचिका दायर कर निगम के फैसले को चुनौती दी थी, और कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया था।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और पाठ्य पुस्तक निगम का पक्ष सुनने के बाद फिलहाल कार्रवाई पर रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने राज्य शासन और पापुनि से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। पापुनि की तरफ से सीनियर अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, और शासन की तरफ से निर्मल शुक्ला और अरजीत तिवारी ने पैरवी की।
छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने जनवरी माह में अनियमितता पर बड़ी कार्रवाई की थी, और इसके लिए जिम्मेदार 5 फर्मों को ब्लैक लिस्ट में कर दिया था। जिन फर्मों को ब्लैक लिस्ट में डाला गया है, उनमें मेसर्स टेक्नो प्रिंट्स रायपुर, मेसर्स प्रगति प्रिंटर्स रायपुर, मेसर्स रामराजा प्रिंटर्स रायपुर, मेसर्स श्रीराम प्रिंटर्स और मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिटर्स प्रा.लिमि. शामिल हैं।
मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिंटर्स प्रा.लिमि. रायपुर के विरूद्ध शिक्षा सत्र 2020-21 में जमा की गई 20 लाख की बैंक गारंटी के संबंध में विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई थी। जिसकी तथ्यों की समीक्षा और संबंधित बैंकों से प्राप्त सूचना अनुसार मुद्रक द्वारा की गई। अनियमितता के विरूद्ध निगम द्वारा मेसर्स शारदा ऑफसेट प्रिंटर्स प्रा.लिमि. रायपुर तीन वर्षों के लिए सूचीबद्ध ब्लैक लिस्ट में डाला गया है।


