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भारत से उलट चीन ने कभी भी ईरान से आने वाले तेल पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई थी.
रिफ़ाइनिटिव ऑयल रिसर्च के मुताबिक़, ईरान से चीन ने बीते 14 महीनों में 17.8 मिलियन टन (3.06 लाख बैरत प्रतिदिन) कच्चा तेल आयात किया है और जनवरी-फ़रवरी में यह रिकॉर्ड स्तर पर था.
इनमें से 75 फ़ीसदी कच्चा तेल ‘अप्रत्यक्ष’ रूप से आयात किया जाता था जिसकी पहचान ओमान, संयुक्त अरब अमीरात या मलेशिया के तेल के रूप में हुई है.
जो चीन में पूर्वी शेंडॉन्ग प्रांत के बंदरगाह से चीन में आता था. इस प्रांत को चीन के स्वतंत्र रिफ़ाइनिंग कंपनियों का घर माना जाता है.
25 फ़ीसदी तेल का आयात आधिकारिक ख़रीद के रूप में चीन के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व के रूप में दिखाया जाता था. अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने इस तरह से दिखाया कि वो कम मात्रा में ईरान से तेल ले रहा है.
विश्लेषक एमा ली रॉयटर्स से कहती हैं कि ईरानी तेल टैंकर पहचाने जाने के डर से अपने ट्रांसपोंडर्स को बंद कर देते थे लेकिन जब वे ओमान, यूएई और इराक़ के तट के नज़दीक़ होते थे तो उन्हें सेटेलाइट से ढूंढा जा सकता था.
ली कहती हैं कि इसके अलावा कुछ तेल टैंकरों को सिंगापुर या मलेशिया के नज़दीक़ बदला जाता था ताकि वे चीन चले जाएं.
तेल की ख़रीद पर सीधे टिप्पणी किए बिना चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के कार्यालय ने कहा है कि ईरान चीन का मित्र राष्ट्र है और दोनों राष्ट्रों ने सामान्य आदान-प्रदान और सहयोग को बरक़रार रखा है.
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन और ईरान के बीच सहयोग अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ढांचे के तहत हुआ है जो कि उचित और वैध है और सम्मान का हक़दार है.
एनआईओसी ने इस पर टिप्पणी करने से इनक़ार कर दिया है और ईरान के तेल मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि जब अमेरिकी प्रतिबंध हटेंगे तब ईरान किसी भी देश को तेल बेचने के लिए सक्षम होगा और कई समझौते किए जाएंगे. (bbc.com)


