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डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद कन्जर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ़्रेंस (सीपीएसी) में पहला भाषण दिया है.
महाभियोग की जाँच में बरी होने के कुछ हफ़्ते बाद ट्रंप सार्वजनिक रूप से सामने आए. महाभियोग में ट्रंप के ख़िलाफ़ कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी वोट किया था. सीपीएसी में ट्रंप ने कहा कि वो नई राजनीतिक पार्टी नहीं बनाएंगे.
ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पर हमला बोलते हुए कहा कि 'अमेरिका फ़र्स्ट' की नीति 'अमेरिका लास्ट' में पहुँच गई है.
सीपीएसी की कॉन्फ़्रेंस फ्लोरिडा में हुई और इसका प्रभाव रिपब्लिकन्स पर अब भी है. सीपीएसी सालाना कॉन्फ़्रेंस है, जिसमें अमेरिका भर के रूढ़िवादी नेता हिस्सा लेते हैं.
इस कॉन्फ़्रेंस का तेवर ट्रंपमय दिखा. इसमें शामिल वक्ताओं में ट्रंप के वफ़ादार और टेक्सस से सीनेटर टेड क्रूज़ के अलावा उनके बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर भी थे. ट्रंप के समर्थकों को पूरी उम्मीद थी कि सीपीएसी में वे ज़रूर बोलेंगे क्योंकि राष्ट्रपति से हटने के बाद से राजनीतिक रूप से बिल्कुल ग़ायब थे.
यूएस कैपिटल में जनवरी महीने में हुए दंगे के बाद से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्विटर और फ़ेसबुक समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अब भी प्रतिबंधित हैं. ट्रंप व्हाइट हाउस छोड़ने के बाद से फ्लोरिडा गोल्फ़ रिसॉर्ट में रह रहे हैं.
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप मंच पर एक घंटे से ज़्यादा देर से पहुँचे लेकिन उनके समर्थक काफ़ी उतावले दिखे. भीड़ में ज़्यादातर लोग बिना मास्क के थे.
ट्रंप ने कहा, ''मैं आपको ये बताने आया हूँ कि आज से चार साल पहले जो हमने यात्रा शुरू की थी वो ख़त्म नहीं हुई है. हम यहाँ अपने भविष्य के बारे में बात करने के लिए आए हैं. हमारे अगले क़दम का भविष्य, हमारी पार्टी का भविष्य और इस प्यारे मुल्क का भविष्य.''
ट्रंप ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की अटकलों को ख़ारिज कर दिया और कहा कि यह फ़र्ज़ी ख़बर है. ट्रंप ने कहा, ''नई पार्टी बनाने से हमारे वोट बँटेंगे और हम कभी जीत नहीं पाएंगे.'' ट्रंप ने राष्ट्रपति बाइडन के शुरुआती फ़ैसलों की आलोचना की. ख़ास कर प्रवासी नीति को लेकर हमलावर दिखे.
ट्रंप ने कहा, "हमलोग सभी रिपब्लिकन पार्टी के हैं और पार्टी पहले से ज़्यादा मज़बूत और एकजुट होगी.'' ट्रंप ने इस भाषण में उस फ़र्ज़ी दावे को दोहराया कि नवंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के कारण वे हार गए.
ट्रंप ने फिर से 2024 के राष्ट्रपति चुनावी में आने के संकेत दिए. उन्होंने कहा, ''आप जानते हैं कि हम व्हाइट हाउस में नहीं हैं. लेकिन कौन जानता है... कौन जानता है? मैं उन्हें तीसरी बार मात देने का भी फ़ैसला कर सकता हूँ.''

ट्रंप ने कहा, ''हम सब जानते हैं कि बाइडन प्रशासन क्या करने वाला है लेकिन इस हद तक इस सरकार में बुरा होगा इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. यह सरकार इस हद तक वामपंथी एजेंडे के साथ जाएगी, ये किसी को अंदाज़ा नहीं था.''
ट्रंप के बेटे ने शुक्रवार को अपने भाषण में पिता की मौजूदगी को लेकर समर्थकों में जोश भर दिया था. जूनियर ट्रंप ने अपने भाषण में ट्रंप के आने को लेकर कहा था, ''भाषण ज़ोरदार होगा. पूरी ऊर्जा के साथ. मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि ट्रंप आपकी भावनाओं को समझते हैं और आप निराश नहीं होने जा रहे.''
ट्रंप जब तक राष्ट्रपति रहे तब तक पार्टी के लोग उनके प्रति व्यापक रूप से वफ़ादार ही रहे. इसके बावजूद हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 10 रिपब्लिकन सासंदों ने महाभियोग के समर्थन में वोट किया था और सात सांसदों ने सीनेट में.
महाभियोग के समर्थन में कुल 57 और विरोध में 43 वोट पड़े थे, जो कि ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए ज़रूरी दो तिहाई वोट से कम था.
कांग्रेस में टॉप रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैक्कॉनेल ने राष्ट्रपति ट्रंप की जमकर आलोचना की थी. उन्होंने यूएस कैपिटल दंगे के लिए व्यवहारिक और नैतिक रूप से ट्रंप को ज़िम्मेदार ठहराया था. हालाँकि उन्होंने ट्रंप के ख़िलाफ़ वोट नहीं किया था.
मिच मैक्कॉनेल पर ट्रंप ने तीखा हमला बोला था. मिच मैक्कॉनेल को ट्रंप ने हठी कहा था. सीपीएसी 1974 में शुरू हुआ था. यह अमेरिका में कन्जर्वेटिव नेताओं का अहम जमावड़ा है और इसे रिपब्लिकन पार्टी की दिशा का बैरोमीटर भी माना जाता है.
नंवबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव हारने और जनवरी में ट्रंप समर्थकों के दंगे के बावजूद ट्रंप की लोकप्रियता कम नहीं हुई है.
पिछले हफ़्ते ही एक सर्वे हुए था. इस सर्वे के नतीजे के अनुसार अगर ट्रंप कोई तीसरी पार्टी बनाते हैं तो उनके 46 फ़ीसदी वोटर्स साथ आएंगे न कि किसी रिपल्बिकन उम्मीदवार को को वोट देंगे. अटकलें पहले से ही तेज़ हैं कि 74 साल के ट्रंप ने अपने राजनीतिक भविष्य के लिए कोई योजना बना रखी है.
सीपीएसी गुरुवार से अलैंडो के हयात रीजेंसी होटेल में शुरू हुई है. ट्रंप के कई वफ़ादार इस सम्मेलन में शरीक नहीं हुए हैं. सीनेटर जोश हैवली, रिप्रेजेंटेटिव मैट गेज़ और पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस सीपीएसी में नहीं आए. (bbc.com)


