ताजा खबर

फरियाद सुनने वाले एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर खुद पहुंचे जिलाधीश के पास ज्ञापन लेकर
12-Jan-2021 9:46 PM
फरियाद सुनने वाले एसडीएम, डिप्टी कलेक्टर खुद पहुंचे जिलाधीश के पास ज्ञापन लेकर

सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर एडमंड लकड़ा को गिरफ्तार कर जेल भेजने का मामला
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 12 जनवरी।
लोगों को पुलिस और प्रशासन से की अनुचित कार्रवाई से बचाने और समस्याओं का हल निकालने वाले राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज खुद फरियादी के तौर पर कलेक्टर से मिले और मुख्य सचिव के नाम पर ज्ञापन सौंपा।

मामला सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर एडमंड लकड़ा से जुड़ा है जिन्हें बैंकुंठपुर, कोरिया जिले की पुलिस ने 6 जनवरी को आदिवासी उत्पीड़न और दूसरी धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया है और वे इस समय जेल में ही हैं।

अपर कलेक्टर बीएस उइके, नगर निगम आयुक्त प्रभाकर पांडेय, अनेक डिप्टी कलेक्टर्स, एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने आज कलेक्टर से मुलाकात कर इस गिरफ्तारी के खिलाफ मुख्य सचिव के नाम पर ज्ञापन सौंपा।

समस्त राजस्व अधिकारीगण के नाम से सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 121 के तहत कि किसी भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट न्यायालय में स्वयं के द्वारा किए गए आचरण के बारे में केवल अदालत ही कोई आदेश दे सकती है। न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम 1985 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करने वाले सभी अधिकारी न्यायाधीश के अंतर्गत आते हैं। इन अधिकारियों को अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत संरक्षण मिला हुआ है। उनके विरुद्ध कोई भी सिविल या दांडिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके अलावा दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 197 के अंतर्गत शासकीय कार्य के दौरान लोक सेवक द्वारा कोई अपराध किया गया है तो उसके लिए सक्षम अधिकारी से अभियोजन की मंजूरी लेना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त भी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करने वाले अधिकारियों को अनेक धाराओं के अंतर्गत संरक्षण मिला है जिसके अंतर्गत यह स्पष्ट है कि पुलिस सीधे इन पर न तो अपराध दर्ज कर सकती न ही गिरफ्तारी।

ज्ञापन देने वाले जिले के डिप्टी कलेक्टर्स और अन्य अधिकारियों ने ज्ञापन के जरिये मांग की है की उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर निरस्त की जाए। कहा गया है कि पुलिस ने जो विधि विरुद्ध कार्रवाई की है, उससे राजस्व अधिकारियों का मनोबल कमजोर हुआ है। वे राजस्व मामलों में आदेश पारित करने को लेकर भयभीत हैं। इस समय सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर जेल में हैं। उन्हें मुक्त किया जाये। दूसरी मांग यह है कि दोषपूर्ण विवेचना करने वाले अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाये। साथ ही पुलिस विभाग को भी निर्देश दिया जाए कि राजस्व अधिकारियों को बिना वजह न्यायालयीन कार्रवाई के दौरान किए गए कार्य के लिए उत्पीड़न का शिकार नहीं बनने दिया जाये।

मामला क्या है?

कोरिया जिले के रामपुर थाने में एक आदिवासी महिला ने शिकायत की थी कि सन् 2014 में उसकी जमीन को मां वैष्णव एसोसियेट्स के नाम पर अवैध तरीके से हस्तांतरित कर दिया गया। उस समय एडमंड लकड़ा कोरिया जिले के बैकुंठपुर मुख्यालय में अपर कलेक्टर थे, जिन्होंने यह आदेश पारित किया। बीते 6 जनवरी की सुबह अम्बिकापुर से डीएसपी धीरेन्द्र पटेल की टीम के साथ पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। लकड़ा के ख़िलाफ़ धारा 294, 506, 420, 467, 468, 471, 374 आईपीसी और अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (1), (द), (ध), 3 (1) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया। 


अन्य पोस्ट