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अमेरिका, 10 जनवरी। अमेरिका ने लंबे समय से अमेरिकी और ताइवान के अधिकारियों के बीच संपर्क पर प्रतिबंध लगाया हुआ था जिसे अब हटाया जा रहा है।
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीनी सरकार के तुष्टीकरण के लिए दशकों पहले अमेरिका ने ख़ुद पर ये प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन अब ये नियम ख़त्म कर दिया गया है।
इस क़दम से चीन नाराज़ हो सकता है और अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढऩे की आशंका है।
ट्रंप सरकार ने अपने आखऱिी दिनों में ये फ़ैसला लिया है।चीन ताइवान को अपना अपना हिस्सा मानता है लेकिन ताइवान के नेताओं का कहना है कि उनका मुल्क संप्रभु है।
विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शनिवार को कहा, आज मैं इस तरह के ख़ुद लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा करता हूं। अब अमेरिका-ताइवान के संबंधों में इस तरह के प्रतिबंधों से कोई रूकावट नहीं आएगी।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ताइवान एक जीवंत लोकतंत्र और एक विश्वसनीय अमेरिकी भागीदार है और ये प्रतिबंध अब वैध नहीं हैं।
इस घोषणा के बाद ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने माइक पोम्पियो को धन्यवाद किया और कहा कि वह आभारी हैं।
उन्होंने एक ट्वीट में लिखा, ताइवान और अमेरिका के बीच घनिष्ठ साझेदारी हमारे साझा मूल्यों, समान हितों और स्वतंत्रता और लोकतंत्र में अटल विश्वास पर आधारित है।
पिछले अगस्त में अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा मंत्री एलेक्स अज़ार दशकों बाद ताइवान में बैठक आयोजित करने वाले पहले टॉप-रैंकिग अमेरिकी राजनीतिज्ञ बने।
चीन ने अपने जवाब में अमेरिका से कहा है कि वह वन चाइना सिद्धांत का सम्मान करे।
अमेरिका ताइवान को हथियार भी बेचता है। हालांकि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक रक्षा संधि नहीं है, जैसा कि अमेरिका की जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस के साथ है।
चीन और ताइवान 1940 के दशक में एक गृह युद्ध के दौरान अलग हो गए थे।
चीन लंबे समय से ताइवान की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश कर रहा है और दोनों ही प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव चाहते हैं।
हाल के वर्षों में तनाव तब बढ़ गया जब चीन ने कहा कि ताइवान को वापस लेने के लिए बल प्रयोग भी किया जा सकता है।
हालाँकि ताइवान को केवल कुछ मु_ी भर देशों की मान्यता प्राप्त है। इसकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के कई देशों के साथ मज़बूत व्यापारिक और अनौपचारिक संबंध हैं। (bbc.com)


