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सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद बनेगी पुनर्वास नीति-चौबे
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 24 दिसंबर। आंध्रप्रदेश के पोलावरम बांध के निर्माण से बस्तर के संभावित डूबान इलाकों को लेकर गुरूवार को विधानसभा में सदस्यों ने चिंता जताई। जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि पोलावरम बांध परियोजना से सुकमा के 9 गांव के डूबान में आने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना से साढ़े 18 हजार से अधिक लोग प्रभावित होंगे। श्री चौबे ने यह भी कहा कि परियोजना के कुछ बिन्दुओं के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही प्रभावितों के पुनर्वास के लिए नीति बनाई जाएगी।
प्रश्नकाल में जनता कांग्रेस की सदस्य डॉ. रेणु जोगी ने मामला उठाया। उन्होंने परियोजना की स्थिति की जानकारी चाही। सदस्य ने कहा कि परियोजना से 13 किमी इलाका डूबेगा। उन्होंने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार ने किन-किन बिन्दुओं पर याचिका लगाई है? जल संसाधन मंत्री ने कहा कि निजी, वनभूमि और सरकारी भूमि मिलाकर करीब 1390 हेक्टेयर जमीन डूबान में आ रही है।
उन्होंने गोदावरी जल ट्रिब्यूनल ने बांध का लेवल 150 मीटर रखने के आदेश दिए थे, जिसे बढ़ाकर 177 मीटर कर दिया गया। इसके लिए छत्तीसगढ़ के प्रभावित इलाकों में जनसुनवाई भी नहीं की गई। पेसा एक्ट में ग्रामसभा का अनुमोदन जरूरी है, लेकिन यह भी नहीं लिया गया। इन बिन्दुओं को लेकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना और ओडिशा सरकार भी सुप्रीम कोर्ट गई है। श्री चौबे ने कहा कि यह परियोजना आंध्रप्रदेश में निर्मित होने वाली राष्ट्रीय परियोजना है। बांध के निर्माण की अद्यतन स्थिति और पूर्णता की जानकारी नहीं है।
जनता कांग्रेस के नेता धर्मजीत सिंह ने कहा कि अफसरों की टीम भेजकर निर्माण की वस्तु स्थिति का पता लगाया जाना चाहिए। पूरा निर्माण हो जाएगा, तब इसकी जानकारी लेने का कोई मतलब नहीं है। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि दो और सरकार परियोजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने भी इसको लेकर सवाल किए। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि परियोजना से 18510 लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है। कांग्रेस सदस्य मोहन मरकाम के सवाल के जवाब में श्री चौबे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही प्रभावितों के पुनर्वास के लिए नीति बनाई जाएगी।


