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-दिलनवाज़ पाशा
संभल में पिछले साल नवंबर में हुई हिंसा के मामले में स्थानीय अदालत ने संभल के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.
एक याचिका पर सुनवाई करते हुए संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.
हिंसा के दौरान गोली लगने से घायल हुए एक युवक के पिता की तरफ़ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह आदेश दिया है. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने 9 जनवरी को दिए गए इस आदेश की कॉपी देखी है.
अदालत ने अपने आदेश में संभल पुलिस को सात दिनों के अंदर एफ़आईआर दर्ज कर उसकी कॉपी अदालत में उपलब्ध कराने के लिए कहा है.
युवक के पिता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनके बेटे को संभल हिंसा के दौरान पुलिस ने गोली मारी. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि गोली लगने के बाद उन्हें छिपकर अपने बेटे का इलाज कराना पड़ा था.
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बेटे के इलाज से जुड़े दस्तावेज़ और ऑपरेशन के दौरान निकाली गई गोली से जुड़ी रिपोर्टें भी पेश की थीं.
युवक के पिता का आरोप था कि उनका बेटा रोज़ी-रोटी कमाने के लिए बाहर निकला था, तभी उसे गोली मार दी गई.
संभल में बीते साल नवंबर में हुई हिंसा में कुल पाँच लोगों की मौत हुई थी. मरने वाले लोगों के परिजनों ने पुलिस पर गोली चलाने के आरोप लगाए थे, हालांकि तब संभल पुलिस के अधिकारियों ने कहा था कि पुलिस की गोली से किसी की मौत नहीं हुई है.
अधिवक्ता क़मर आलम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए कहा, “एफ़आईआर दर्ज करने का यह आदेश एक लंबी और जटिल क़ानूनी प्रक्रिया के बाद हुआ है.”
उन्होंने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि अदालत की निगरानी में निष्पक्ष विवेचना हो सकेगी. अदालत के इस फ़ैसले से पीड़ित का न्याय व्यवस्था में भरोसा मज़बूत होगा.”
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात करते हुए संभल एसपी कृष्ण बिश्नोई ने कहा, "हिंसा की पूर्व में ज्यूडिशियल इंक्वायरी हो चुकी है, उसमें पुलिस कार्रवाई सही पाई गई थी. इसलिए मुक़दमा दर्ज नहीं किया जाएगा. कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील की जाएगी."
अधिवक्ता क़मर आलम ने बताया, “हमने यह याचिका 4 फ़रवरी 2025 को दायर की थी. इस याचिका की सुनवाई के दौरान पंद्रह से अधिक बार बहस हुई. कई बार अदालत ने हमारी याचिका से जुड़ी रिपोर्टें मंगवाईं. अब लंबी जद्दोजहद के बाद यह फ़ैसला आया है.”
अधिवक्ता क़मर आलम के मुताबिक़, “याचिका दायर करने के बाद पुलिस ने पीड़ित को संभल हिंसा से जुड़े एक मुक़दमे में अभियुक्त भी बनाया है. वह अभी भी क़ानूनी लड़ाई में फंसा हुआ है.” (bbc.com/hindi)


