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शिलांग क्वायर के अनूठे प्रयोग ने मचाई सोशल मीडिया पर धूम
24-Dec-2020 12:55 PM
शिलांग क्वायर के अनूठे प्रयोग ने मचाई सोशल मीडिया पर धूम

मेघालय में शिलांग चैंबर क्वायर एससीसी की ओर से क्रिसमस के मौके पर जारी एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर पहले के तमाम रिकार्ड तोड़ दिए हैं. इसे अब तक 35 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है.

   डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी का लिखा-

शिलांग चैंबर क्वायर को अब तक कर्णप्रिय गीतों के लिए जाना जाता रहा है. लेकिन इस ईसाई-बहुल राज्य में अबकी क्रिसमस के मौके पर रिलीज कम होम क्रिसमस शीर्षक अलबम ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा रखा है. इसके गीतों में मध्य-पूर्व की विभिन्न भाषाओं के साथ ईसा मसीह के दौर में बोली जाने वाली अरामेइक के साथ हिब्रू, फारसी, उर्दू, मेघालय की स्थानीय खासी भाषा और अंग्रेजी का फ्यूजन है.

क्वायर के संस्थापक नील नोंग्कीरीह बताते हैं कि इस बार एक नए प्रयोग के तहत अलबम के आठ गीतों में हमने कुछ नया करने की ठानी थी. लेकिन तब यह कल्पना भी नहीं की थी कि यह सोशल मीडिया पर तहलका मचा देगा. इस अलबम को बीते सप्ताह पूरी दुनिया में रिलीज किया गया है. लेकिन महज पांच दिनों में इसने तमाम रिकार्ड तोड़ दिए हैं. इसका ऑनलाइन कंसर्ट 22 दिसंबर को आयोजित किया गया.

क्या है ऐसा खास अलबम में

आखिर इस अलबम में ऐसा क्या है? नील बताते हैं, "कोरोना महामारी और इसकी वजह से लंबे लॉकडाउन ने समाज के जीने का अंदाज बदल दिया है. हम सोच रहे थे कि ऐसा क्या किया जाए कि मुरझाए समाज में जीवन के प्रति नई जीजिविषा पैदा हो और लोग बीते दौर को भुला कर सामान्य जीवन की ओर लौट सकें. यह प्यार औऱ सामाजिक बंधन को मजबूत करने का हमारा प्रयास है.” ऐसा अलबम बनाने की प्रेरणा के बारे में पूछे जाने पर वह बताते हैं कि उनके ग्रुप की मुलाकात स्विट्जरलैंड में मेल्के टेकिन नामक एक ऐसे इंसान से हुई थी जो प्राचीन अरामेइक भाषा धाराप्रवाह तरीके से बोल सकते थे. उन्होंने गो टेल इट ऑन द माउंटेन और ग्लोरी टू गॉड शीर्षक वाले दो गीतों के अंग्रेजी संस्करण का अनुवाद भी कर दिया. यूट्यूब पर रिलीज होने के महज दो दिनों के भीतर इन गीतों को 20 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा था. इसी तरह लंदन की एक महिला ने वी द किंग्स गीत का फारसी में अनुवाद कर दिया. यह किसी करिश्मे से कम नहीं था.

लेकिन क्या ताजा अलबम में फ्यूजन के प्रयोग से यह खतरा नहीं था कि शायद स्थानीय लोग इससे जुड़ाव में दिक्कत महसूस करें? नील कहते हैं, "मैं जब भी कुछ करता हूं तो उसमें बड़ा खतरा होता है. लेकिन मैं हमेशा वह खतरा उठाता हूं. उसी वजह से अच्छी, खराब, बदतर और सुंदर चीजें आती हैं. अगर आप खतरा उठाने से डरेंगे तो एक सामान्य व्यक्ति रह जाएंगे और मैं सामान्य बन कर नहीं जी सकता.” लॉकडाउन के दौरान क्वायर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसी से हाथ नहीं मिला पाना और बार-बार हाथ धोना थी. नील बताते हैं, "एक ग्रुप के तौर पर दुनिया के विभिन्न देशों के दौरे और उनकी संस्कृतियों को आत्मसात करने की वजह से हमलोग भीतर से काफी मजबूत हो गए थे. इसलिए इस संकट के दौरान भी हम काम पर डटे रहे. जीवन सबसे बड़ा सबक है. महामारी हो या नहीं, आपका जीवन रोज एक नई चुनौती पेश करता है.

लोगों ने हाथों हाथ लिया अलबम को

बचपन में बोनी एम के बड़े प्रशंसक रहे नील चाहते थे कि वे पारंपरिक क्रिसमस गीतों में मध्य-पूर्व और पश्चिम का तड़का लगा कर उनको एक नया स्पर्श देते हुए बोनी की परंपरा को पुनर्जीवित करें. अब पीछे देखने पर खासकर गो टेल इट ऑन द माउंटेन और उसके बाद के गीतों को मिलने वाली लोकप्रियता से नील को लगता है कि वे अपना लक्ष्य पाने में कामयाब रहे हैं. क्वायर के सदस्यों ने 22 दिसंबर को आयोजित ऑनलाइन कंसर्ट में अपने ताजा अलबम के गीतों को गाकर धूम मचा दिया. इससे होने वाली आय जेनेसिस फाउंडेशन नामक एक गैर-सरकारी संगठन को दी जाएगी जो दिल की गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब बच्चों को इलाज कराती है.

मेघालय समेत पूरी दुनिया के लोगों ने इस अलबम को हाथों हाथ लिया है. राजधानी शिलांग में एक कालेज छात्र डीके मराक कहते हैं, "यह अलबम बेहद खास है. पहले कभी किसी ने ऐसा कोई प्रयोग नहीं किया था. स्कूल-कॉलेज के छात्रों से लेकर बुजुर्गों तक को यह बेहद पसंद आया है. इसके गीत लोगों की जुबान पर चढ़ गए हैं. खासकर कोरोना के मौजूदा दौर में क्वायर के इस ताजा अलबम ने लोगों में नया उत्साह भर दिया है.”


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