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नई दिल्ली, 24 दिसंबर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल २०१३ मुज़फ़्फ़रनगर में आयोजित महापंचाय में भड़काऊ भाषण के अभियुक्त बीजेपी नेताओं के पर चल रहे मामलों को वापस लेने की पहल की है.
इनमें भारतीय जनता पार्टी के तीन नेता भी शामिल हैं. इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
भड़काऊ भाषण देने के मामले में मुज़फ़्फ़रनगर के सिखेड़ा पुलिस स्टेशन में बीजेपी नेता संगीत सोम, सुरेश राणा, कपिल देव और हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची के ख़िलाफ़ मामला दर्ज है.
बीजेपी के इन नेताओं पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन, सरकारी अधिकारियों से बहस करने और लोगों को भड़काने के आरोप हैं.
मुज़फ़्फ़रनगर में सरकारी वकील राजीव शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले को वापस लेने की अपील अदालत में दायर की गई है और मामला अभी भी लंबित है.
सात सितंबर, २०१३ को जाट समुदाय ने नगला मंदौड़ गाँव के इंटर कॉलेज में एक महापंचायत बुलाई थी. महापंचायत कवाल गाँव में २७ अगस्त, २०१३ को हुई दो युवकों की हत्या के सम्बन्ध में आगे की योजना तय करने के लिए बुलाई गई थी.
बीजेपी नेताओं और साध्वी प्राची पर इस महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे और महापंचायत ख़त्म होने के बाद इलाके में संप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी.
भड़काऊ भाषण के अभियुक्त बीजेपी नेताओं का केस वापस लेने की अर्ज़ी
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2013 मुज़फ़्फ़रनगर में आयोजित महापंचाय में भड़काऊ भाषण के अभियुक्त बीजेपी नेताओं के पर चल रहे मामलों को वापस लेने की पहल की है.
इनमें भारतीय जनता पार्टी के तीन नेता भी शामिल हैं. इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
भड़काऊ भाषण देने के मामले में मुज़फ़्फ़रनगर के सिखेड़ा पुलिस स्टेशन में बीजेपी नेता संगीत सोम, सुरेश राणा, कपिल देव और हिंदूवादी नेता साध्वी प्राची के ख़िलाफ़ मामला दर्ज है.
बीजेपी के इन नेताओं पर निषेधाज्ञा के उल्लंघन, सरकारी अधिकारियों से बहस करने और लोगों को भड़काने के आरोप हैं.
मुज़फ़्फ़रनगर में सरकारी वकील राजीव शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले को वापस लेने की अपील अदालत में दायर की गई है और मामला अभी भी लंबित है.
सात सितंबर, 2013 को जाट समुदाय ने नगला मंदौड़ गाँव के इंटर कॉलेज में एक महापंचायत बुलाई थी. महापंचायत कवाल गाँव में 27 अगस्त, 2013 को हुई दो युवकों की हत्या के सम्बन्ध में आगे की योजना तय करने के लिए बुलाई गई थी.
बीजेपी नेताओं और साध्वी प्राची पर इस महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगे थे और महापंचायत ख़त्म होने के बाद इलाके में संप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी. (https://www.bbc.com/)


