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राईस मिल में बिजली कनेक्शन नहीं, और मिलिंग कर चावल भी जमा करा दिया !
23-Dec-2020 2:08 PM
राईस मिल में बिजली कनेक्शन नहीं, और  मिलिंग कर चावल भी जमा करा दिया !

कांग्रेस सदस्य का सवाल, मंत्री ने जांच के आदेश दिए 

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 दिसंबर।
राजनांदगांव जिले में धान की कस्टम मिलिंग में अनियमितता का मामला बुधवार को विधानसभा में उठा। कांग्रेस सदस्य  दलेश्वर साहू ने आरोप लगाया कि कुछ राईस मिलरों ने बिजली कनेक्शन  लिया ही नहीं, और धान का उठाव कर चावल भी जमा करा दिया। उन्होंने इस फर्जीवाड़े की जांच की मांग की। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि सारी जांच-पड़ताल के बाद भी मिलिंग के लिए धान दिए जाते हैं। कांग्रेस और विपक्षी भाजपा सदस्यों के जोर देने पर खाद्य मंत्री ने प्रकरण की जांच कराने की घोषणा की।

प्रश्नकाल में कांग्रेस सदस्य दलेश्वर साहू ने मामला उठाया। इसके जवाब में खाद्य मंत्री ने बताया कि राजनांदगांव जिले में खरीफ वर्ष-2019-20 में कस्टम मिलिंग के लिए 79 राईस मिलर्स पंजीकृत थे। इन मिलरों को 2 लाख 40 हजार 998 टन धान और उसना मिलिंग के लिए 3 लाख 47 हजार 476 टन धान प्रदाय किया गया। इससे पहले जिले में खरीफ वर्ष 2018-19 में मिलिंग के लिए 70 राईस मिलर्स पंजीकृत थे। 

उन्होंने कहा कि पंजीकृत मिल का बिजली का लाइसेंस और अन्य सुविधाएं होनी चाहिए। इसके लिए नियम बनाए गए हैं, और इसका निरीक्षण भी किया जाता है। श्री साहू ने कुछ राईस मिल का नाम गिनाया, और ऐसे मिल जहां बिजली का कनेक्शन ही नहीं है, उन्हें मिलिंग के लिए धान दे दिया गया। उन्होंने कहा कि करीब 60 हजार टन धान दिया गया है, और 40 हजार टन चावल भी वापस कर दिया। श्री साहू ने अपनी मौजूदगी में प्रकरण की जांच कराने की मांग की। 

खाद्य मंत्री ने कहा कि निरीक्षण और अन्य जरूरी सुविधाएं होने पर ही राईस मिल का पंजीयन होता है। उन्होंने कांग्रेस सदस्य की जानकारी का परीक्षण कराने का आश्वासन दिया। कांग्रेस सदस्य इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनके समर्थन में जोगी पार्टी के सदस्य धर्मजीत सिंह और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक भी बोलने लगे। दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। बाद में खाद्य मंत्री श्री भगत ने प्रकरण की जांच कराने की घोषणा की। 


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