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आदिवासी नेतृत्व पर मंथन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 दिसंबर। अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय के निवास पर रविवार को हुई भाजपा के प्रमुख आदिवासी नेताओं की बैठक पर पार्टी में हलचल है। श्री साय ने कहा कि प्रदेश भाजपा की हालत अत्यंत चिंताजनक है। पार्टी से आदिवासी समाज क्यों पृथक हुआ है, इसको लेकर चिंतन-मनन हुआ है।
श्री साय ने प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय के अलावा रामविचार नेताम और अन्य नेताओं के साथ बैठक की थी। उन्होंने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि प्रमुख नेताओं के साथ बैठक में समाज को कैसे ताकतवर बनाया जाए, इस पर गंभीर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा काफी कमजोर हो गई है, यह अत्यंत चिंताजनक है। आदिवासी समाज पार्टी से दूर हो गया है। बस्तर और सरगुजा से भाजपा का पूरी तरह सफाया हो गया है।
श्री साय ने कहा कि बैठक में समाज के लोगों की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर भी चिंतन किया गया। कुछ लोग तो आगे बढ़ गए, लेकिन बड़ा तबका पिछड़ा हुआ है। विशेष जनजातियों के लोगों की स्थिति अच्छी नहीं है। इनको कैसे आगे बढ़ाया जाए, इसको लेकर विचार किया गया।
आदिवासी मुख्यमंत्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैठक में आदिवासी नेतृत्व को लेकर चर्चा हुई है। जमीनी स्तर पर समाज और पार्टी को मजबूत बनाने की दिशा में काम करने की जरूरत है, और इसके लिए आगे भी रणनीति बनाई जाएगी।


