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संसदीय सचिवों पर सदन में गरमागरम बहस, चंद्राकर के टोकने पर भडक़े सीएम
21-Dec-2020 3:06 PM
संसदीय सचिवों पर सदन में गरमागरम बहस, चंद्राकर के टोकने पर भडक़े सीएम

  अधिकारों पर सकुर्लर जारी करने परंपरा नहीं-अकबर  

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 दिसंबर।
संसदीय सचिवों के अधिकारों और कर्तव्यों पर सरकार की तरफ से कोई आदेश जारी होने से नहीं करने के मामले में सोमवार को विधानसभा में जमकर शोर-शराबा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि आसंदी के आदेश के बाद भी सरकार संसदीय सचिवों के अधिकारों को लेकर कोई सकुर्लर जारी नहीं कर रही है। इस पर विधि मंत्री मोहम्मद अकबर के जवाब के बीच में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर की टोका-टाकी पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भडक़ गए, और उनकी अजय चंद्राकर के साथ तीखी नोंक-झोंक हुई। कुछ देर के लिए सदन का माहौल गरम रहा, तब सभापति सत्यनारायण शर्मा के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। 

प्रश्नकाल के बाद पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश और विधानसभा अध्यक्ष के दो बार निर्देश के बाद भी संसदीय सचिवों के अधिकारों पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। चंद्राकर ने आसंदी की अवमानना करार दिया। भाजपा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने भी पिछले तीन सत्र से यह विषय उठ रहा है। सदन को जानने का हक है कि संसदीय सचिवों को क्या अधिकार हैं? क्या सुविधाएं दी जा रही हैं? विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसको लेकर निर्देश दिए हैं। 

अग्रवाल ने कहा कि संसदीय सचिवों के कर्तव्यों को परिभाषित किया जाना चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि हमारे 14 सदस्यों (संसदीय सचिव) को नहीं मालूम कि उनके कर्तव्य क्या हैं? आखिर आदेश जारी करने में क्या दिक्कत है? विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने साफ किया कि संसदीय सचिवों पर हाईकोर्ट के सरकार को किसी तरह के निर्देश नहीं है। वे बोल रहे थे कि अजय चंद्राकर ने अपनी बात कहनी शुरू कर दी, इस पर मुख्यमंत्री श्री बघेल भडक़ गए। 

उन्होंने कहा कि मंत्री को अपनी बात पूरा करने नहीं दिया जा रहा है।  इस दौरान मुख्यमंत्री की श्री चंद्राकर से तीखी बहस हुई। इसके बाद सत्तापक्ष के सदस्य और विपक्षी सदस्य अपनी जगह पर खड़े हो गए, और जोर-जोर से बोलना शुरू कर दिया। इस दौरान जमकर शोर-शराबा हुआ। सभापति ने दोनों पक्ष के सदस्यों को शांत कराया। इसके बाद पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम को नसीहत दी कि उन्हें आवेश में नहीं आना चाहिए। शिवरतन शर्मा ने कहा कि आसंदी की अनुमति से सदस्यों को बोलने का अधिकार है। सदन के नेता रोक नहीं सकते।
 
संसदीय कार्यमंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि सदन के नेता खड़े होते हैं, तो उनकी बात सुननी चाहिए। आसंदी की अनुमति से विधि मंत्री जवाब दे रहे हैं, तो इस पर टोका टाकी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में भी संसदीय सचिव नियुक्त हुए थे, तब उस समय सकुर्लर क्यों जारी नहीं किया गया? बाद में विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि हाईकोर्ट और न ही विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय सचिवों के अधिकार और कर्तव्य परिभाषित करने की निर्देश दिए हैं। और पहले इस तरह की कोई परम्परा भी नहीं रही है। बाद में भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर ने श्री अकबर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की सूचना दी। सभापति ने दोनों ही मामलों पर व्यवस्था सुरक्षित रखा है। 


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