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पहले भी एक मामले में कोर्ट ने ऐसा ही दिया था फैसला
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 20 दिसम्बर। कोविड-19 ड्यूटी में शामिल नहीं होने के कारण एक डॉक्टर के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को हाईकोर्ट ने निरस्त करने का आदेश दिया है। अक्टूबर माह में भी एक मामले में हाईकोर्ट का ऐसा फैसला आ चुका है।
जांजगीर जिले के मालखरौदा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक डॉ. संतोष पटेल ने कोविड-19 के लिये प्रशिक्षण में उपस्थित होने के प्रभारी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के 8 जून 2020 के आदेश का पालन नहीं किया। उन्होंने इसकी वजह अपनी बेटी का अस्वस्थ होना बताया। इस पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी जांजगीर के आदेश का हवाला देते हुए प्रभारी बीएमओ कल्याणी सिंह ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मालखरौदा पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 56 के तहत अपराध दर्ज कर लिया। डॉ. पटेल ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की और एफआईआर निरस्त करने की मांग की।
उन्होंने अपनी याचिका में बताया कि प्रभारी बीएमओ का उनके साथ पहले से ही सरकारी आवास को खाली करने का विवाद चल रहा था। उन्हें प्रभारी बीएमओ के लिये आवास खाली करने का निर्देश दिया गया था जिसका उन्होंने जवाब दिया था। इसके बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है।
मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस उपरोक्त दोनों धाराओं के अंतर्गत अपराध दर्ज नहीं कर सकती। डॉ. पटेल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को कोर्ट ने निरस्त कर दिया।
ज्ञात हो कि बीते अक्टूबर माह में भी इसी तरह का एक मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आया था जिसमें अम्बागढ़ चौकी की डॉक्टर अपूर्वा घिया के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। डॉ. घिया के खिलाफ धारा 188 के दर्ज मामले में कोर्ट ने कहा था कि धारा 188 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज नहीं किया जा सकता। किसी लोक सेवक को एफआईआर दर्ज करने या कराने का अधिकार नहीं है। इस मामले की सुनवाई भी जस्टिस संजय के. अग्रवाल की कोर्ट में हुई थी।


