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करीब पांच हजार करोड़ खर्च, अनियमितताओं की शिकायतें भी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 12 दिसंबर। नवा रायपुर विकास प्राधिकरण की योजनाओं में पिछले 10 साल में करीब 5 हजार करोड़ रूपए खर्च हुए हैं। मगर इन खर्चों का ऑडिट नहीं हुआ है। प्राधिकरण ने लोकल फंड ऑडिट से इसका ऑडिट कराने का फैसला लिया है।
बताया गया कि नवा रायपुर में वर्ष-2009-10 के बाद से ऑडिट ही नहीं हुआ है। पूर्व सीएस आरपी मंडल ने एनआरडीए की जिम्मेदारी संभालने के बाद खर्चों के हिसाब-किताब के लिए नए सिरे से ऑडिट कराने का फैसला लिया है। डायरेक्टर, ऑडिट को यहां पिछले 10 साल के खर्चों का ऑडिट कराने के लिए कहा गया है। इस दौरान करीब पांच हजार करोड़ के आसपास अलग-अलग परियोजनाओं और जमीन अधिग्रहण पर खर्च हुए हैं।
दूसरी तरफ, एनआरडीए में दूसरे विभागों के अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके अलावा कुछ संविदा पर भी अधिकारी-कर्मचारी रखे गए हैं। इसके अलावा एजेंसियों की भी सेवाएं ली जा रही हैं। भारी भरकम खर्च के बाद यहां आय तकरीबन नहीं के बराबर रह गई है। नवा रायपुर विकास प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति बूरी तरह चरमरा गई है। हाल यह है कि ज्यादातर निर्माण कार्यों को बंद करना पड़ा है। बैंकों से ऋण लिए गए हैं।
कुछ जरूरी परियोजनाएं धीरे-धीरे चल रही हैं। मसलन, रेल्वे स्टेशन का निर्माण चल रहा है। वहां चार स्टेशन बनाए जाने हैं, लेकिन फिलहाल एक ही बनाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक विभागीय मंत्री मोहम्मद अकबर ने एनआरडीए की आय बढ़ाने और नई परियोजना शुरू करने के लिए पहल की है। फिलहाल गैर जरूरी खर्चों की कटौती की जा रही है। साथ ही साथ आय बढ़ाने के लिए प्लाटो की बिक्री के लिए कहा गया है। मंदी के कारण भी एनआरडीए की परियोजनाओं पर असर पड़ा है।
दूसरी तरफ, वित्तीय अनियमितताओं की भी काफी शिकायतें आई हैं। लोक आयोग और अन्य जगहों पर शिकायतें दर्ज हैं, किन्तु कोई कार्रवाई नहीं हुई है। एनआरडीए से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत जानकारी हो सकेगी, और कार्रवाई की जाएगी।


