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'मिनी रेफरेंडम' में शिक्षितों के बीच भाजपा की हार : शिवसेना नेता
14-Dec-2020 7:35 PM
'मिनी रेफरेंडम' में शिक्षितों के बीच भाजपा की हार : शिवसेना नेता

नागपुर, 14 दिसंबर | शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हालिया शिक्षकों और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में विधान प्रिषद चुनाव में हार शिक्षित और मध्यम वर्ग का पार्टी के प्रति झुकाव नहीं होना दर्शाती है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की नीति के खलाफ जनमत संग्रह करार दिया। एक कदम आगे बढ़ते हुए, उन्होंने आगाह किया कि भाजपा के वैचारिक मेंटर का नियंत्रण शायद खिसक रहा है। किसान नेता किशोर तिवारी ने सोमवार को यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को लिखे एक खुले पत्र में यह बात कही।

उन्होंने महाराष्ट्र में 5 शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों के परिणामों का उल्लेख किया, पिछले सप्ताह जिनमें से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस ने 2-2 और निर्दलीय ने एक सीट जीती।

सबसे ज्यादा नुकसान नागपुर डिवीजन स्नातक सीट को माना जा रहा है जो 58 साल बाद कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत वंजारी द्वारा आरएसएस के गढ़ नागपुर में भाजपा को हराकर हासिल की गई।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भाजपा को एक और शर्मिदगी देखने को मिली, जहां समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शासित राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में स्नातक सीट जीत ली।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के सलाहकार और एक दर्जा प्राप्त मंत्री तिवारी ने कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षित सुधारक, जागरूक लोग और बड़े पैमाने पर मध्यम वर्ग के करदाता हैं।

हालांकि, वाराणसी, इलाहाबाद-झांसी, गोरखपुर-फैजाबाद (यूपी) और नागपुर, पुणे, औरंगाबाद और अमरावती (महाराष्ट्र) में भाजपा की हार एक गंभीर कहानी है।

तिवारी ने कहा, "एक तरह से, आपको इस तथ्य की सराहना करनी चाहिए कि यह 'मिनी-रेफरेंडम' की तरह, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में फैले 60 लाख से अधिक लोगों को मिलाकर समाज के सबसे योग्य बड़े तबके की भावनाओं का एक सैम्पल सर्वेक्षण भी है।"

उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्य और अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग के बीच हार ने भाजपा को जोरदार झटका दिया है।

तिवारी ने चेतावनी दी कि इन्हें 'सामान्य हार' नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने आरएसएस से खुली बहस और आत्मनिरीक्षण करने की मांग की।

उन्होंने यह भी कहा कि क्या भाजपा ने भारतीय समाज के शिक्षित, मध्यम वर्ग के विश्वास को इस सबसे बड़े नमूना सर्वेक्षण (60 लाख से अधिक मतदाताओं) से परिलक्षित किया है, क्या यह पीएम की नीतियों की विफलता है?

तिवारी ने पूछा, "क्या यह संदेश गया है कि कि भाजपा कॉर्पोरेट और पूंजीपतियों की मदद कर रही है, क्या पीएम का तथाकथित 'जादू' विफल हो गया है, खासकर मूक धर्मनिरपेक्ष हिंदुओं के बीच, जो अब उनकी बेहद सांप्रदायिक विभाजनकारी नीतियों, 'लव-जिहाद' का समर्थन नहीं करते हैं।"

वसंतराव नाइक शेटी स्वावलंबन मिशन (वीएनएसएसएम) के अध्यक्ष, तिवारी ने महाराष्ट्र भाजपा के नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और उनकी बैंकर-पत्नी अमृता को भी निशाने पर लिया।

तिवारी ने कहा, "मैंने आपसे 'अमृता-वाणी' के माध्यम से फैलने वाले अनुचित हस्तक्षेप और वेनम को देखने का भी अनुरोध किया था, जिसे आम लोगों ने लौटाया है। लेकिन कोई सुधारात्मक उपाय दिखाई नहीं दे रहे हैं और यह संदेश फैलाया जा रहा है कि 'भगवान इंद्र' और उनकी 'अमृता-वाणी' व्यावहारिक रूप से राज्य भाजपा के मालिक हैं।"

उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में सत्ता की भूखी भाजपा शिवसेना को महागठबंधन सरकार (शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस) से बाहर निकालने और सत्ता हथियाने के लिए लगातार निशाना बना रही है, लेकिन इसका दांव नहीं चला।

--आईएएनएस


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