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भोपाल, 13 दिसंबर | मध्य प्रदेश में ठंड के बढ़ते जोर के बीच तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की तपिश भी बढ़ रही है। इस आंदोलन को लेकर छोटा किसान गांव तक ही सिमटा हुआ है, वहीं सरकार यह मानकर चल रही है कि किसानों में कानूनों को लेकर असंतोष है ही नहीं। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य मंे किसान आंदोलन वैसा नजर नहीं आ रहा है जैसा पंजाब, हरियाणा, के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान आदि में है। राज्य के ग्वालियर-चंबल के अलावा देवास आदि इलाके से जरुर किसानों के कई जत्थे दिल्ली गए हैं, मगर बाकी हिस्सों का किसान अपने गांव और खेत में ही है।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि राज्य के मालवा-निमाड़ और महाकौशल इलाके से दिल्ली की दूरी अधिक है, इसलिए यहां के कुछ हिस्सों का ही किसान दिल्ली गया है। बाकी इलाकों के किसान अपने-अपने क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे हैं। हां आमजन को इसलिए इसकी ज्यादा जानकारी नहीं हो पा रही है क्योंकि मीडिया में ज्यादा जगह नहीं मिल रही है।
किसानों के बीच काम करने वाले जानकारों का मानना है कि राज्य के अधिकांश किसान छोटी जोत के हैं, उनके पास एक से पांच एकड़ जमीन ही है, वहीं आदिवासी इलाके के किसानों के पास तो इससे भी कम जमीन है। लिहाजा इन किसानों के खेतों में जो उपज होती है वह उनके परिवार के भरण-पोषण में ही पूरी हो जाती है और अगर कुछ बचती है तो उसे वे अपने गांव में ही बेच देते हैं। इस तरह इन किसानों का मंडी से वास्ता ही नहीं पड़ता। दूसरा, कोरोना के काल में ये कानून पारित किए गए और किसानों को इसके बारे में विस्तार से जानकारी भी नहीं है। इसलिए छोटे किसानों का विरोध गांव तक ही सीमित हैं। यही बात राज्य सरकार के लिए राहत वाली है।
झाबुआ के मेघनगर के किसान दिनेश राय का कहना है कि किसानों में कानून को लेकर गुस्सा है, मगर कोरोना जैसी महामारी के कारण वे ज्यादा संख्या में सड़कों पर उतरने से परहेज कर रहे हैं। किसान अपने खेत और गांव पर ही रहकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। किसी भी गांव में चले जाइए किसानों में इन कानूनों को लेकर खासा गुस्सा है।
वहीं दूसरी ओर भाजपा किसानों को भड़काने की कोशिश का कांग्रेस पर आरेाप लगा रही है। यही कारण है कि पार्टी ने संभाग और जिला स्तर पर किसान सम्मेलन करने का फैसला लिया है। तो वहीं कृषि मंत्री कमल पटेल गांव गांव में पहुॅचकर चौपाल लगा रहे हैं और सीधे तौर पर कांग्रेस पर किसानों को भड़काने का आरेाप लगा रहे हैं। पटेल का दावा है कि इन कानूनों से किसान खुश है क्योंकि उसे लाभ होने वाला है।
--आईएएनएस


