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राज्य में 15 सौ करोड़ के पूंजी निवेश-भूपेश
13-Dec-2020 1:57 PM
राज्य में 15 सौ करोड़ के पूंजी निवेश-भूपेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 दिसंबर।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रविवार को लोकवाणी में इस बार ‘छत्तीसगढ़ सरकार दो वर्ष का कार्यकाल’ विषय पर प्रदेशवासियों से बात की। मुख्यमंत्री ने रेडियो वार्ता में कहा कि आम जनता, किसानों, आदिवासियों और कमजोर तबकों का सशक्तिकरण छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की प्रमुख विशेषता है। छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा देकर लोगों के मन में अपनी संस्कृति और अस्मिता को लेकर गौरव का भाव फिर से जगाया। दो साल में छत्तीसगढ़ में 15 सौ करोड़ के पूंजी निवेश हुए हैं। 

मुख्यमंत्री ने इन श्रोताओं को जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान, एक लोक प्रदेश के रूप में है। हर अंचल की अपनी परंपराएं और संस्कृति हैं। छत्तीसगढ़ी व्यक्ति का मूल स्वभाव अपनी परंपराओं और संस्कृति के साथ जीने का है। राज्य बनने के बाद यह उम्मीद थी कि प्रदेश का विकास अपनी सांस्कृतिक जड़ों से ही होगा। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। हमने अपने परंपरागत पर्वों, त्यौहारों का गौरव लौटाया। लोकवाणी में जांजगीर-चांपा की तुलसी साहू ने मुख्यमंत्री से पूछा था कि छत्तीसगढ़ के त्यौहारों तीजा-पोला और विश्व आदिवासी दिवस पर छुट्टियां देने का यह विचार कैसे आया। इसी तरह बिलासपुर की प्रतीक्षा तिवारी ने जानना चाहा कि जब पूरा देश आर्थिक मंदी से जूझ रहा है लेकिन इसका प्रभाव हमारे छत्तीसगढ़ पर नहीं पड़ा। 

लोकवाणी में उद्योग और व्यापार जगत के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में उठाए गए कदमों, योजनाओं के असर के बारे में कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी, स्पंज आयरन एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल नचरानी, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के महेन्द्र मुकीम ने भी अपने विचार साझा करने के लिए संदेश रिकॉर्ड कराया था। इसी तरह तृतीय लिंग समुदाय की डॉक्टर विद्या राजपूत ने उद्योग नीति, तृतीय लिंग व्यक्तियों के लिए अनुकम्पा और खेल नीति में किए गए प्रावधानों का उल्लेख किया। 

विगत दो सालों में 887 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, 15 हजार करोड़ रूपए का पूंजी निवेश और 15 हजार 4 सौ लोगों को इन उद्योगों में रोजगार मिलना उत्साहजनक है। मनरेगा में 25 लाख से अधिक लोगों को हर रोज काम देने का उदाहरण है, बेरोजगारी दर 22 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत तक लाने का उदाहरण भी है। हम चाहेंगे कि हमारी नई औद्योगिक नीति से आदिवासी अंचलों में भी तेजी से उद्योग लगे और क्षेत्रीय विकास का मार्ग प्रशस्त हो, वहीं रोजगार के नए-नए अवसर बने।


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