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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 10 दिसंबर। आज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर भिलाई से चल कर रायपुर आने वाली मानव अधिकार पदयात्रा जो सुविख्यात अधिवक्ता और मजदूर नेत्री सुधा भारद्वाज की रिहाई की मांग कर रही थी, उसे भिलाई में ही खुर्सीपार के पास पुलिस ने रोक दिया। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति और छत्तीसगढ़ पीयूसीएल ने पुलिस के इस अलोकतांत्रिक मनमानी वाले रवैया की कड़ी आलोचना की है।
ज्ञात हो कि सुधा भारद्वाज विगत 30 वर्षों से छत्तीसगढ़ के मजदूर, किसान, दलित, आदिवासियों, महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्षरत रही हैं। छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के विशाल मजदूर आन्दोलन के साथ-साथ वह मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल, छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन एवं कई अन्य संगठनों के साथ- साथ जुड़ी रहीं तथा उनका महत्वपूर्ण योगदान भी रहा है। जनवरी 2018 में महाराष्ट्र में हुए भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में उन्हें 28 अगस्त को फरीदाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर कार्यकर्ता समिति) कलादास डेहरिया, पीयूसीएल डिग्री प्रसाद चौहान , शालिनी गेरा का कहना है कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में देश भर के कई अधिवक्ता मानव अधिकार कार्यकर्ता, बुद्धिजीवियों, सांस्कृतिक कर्मियों को इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाकर कैद कर रखा गया है, जबकि इसमें से कितने ही लोगों का वहां हुए आयोजन से कोई संपर्क नहीं था, और न ही वहां कभी गए हैं। सुधा भारद्वाज को भी इसी तरह एक फर्जी पत्र के आधार पर फंसाकर ढाई सालों से कैद कर रखा गया है। अभी तक उनके ट्रायल का शुरू न होना, महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद नए सरकार के पहल को देखते हुए इस केस को एनआईए को सौंप देना एक एक गंभीर साजिश को दर्शाता है। सुधा भारद्वाज पूर्व से ही कई बिमारियों से ग्रस्त थीं, तथा विगत कुछ दिनों में ह्रदय सम्बन्धी अन्य समस्याओं के उभरने के बावजूद भी उनकी रिहाई न होना, उनके प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
उन्होंने आगे बताया कि यह पदयात्रा भिलाई पॉवर हाउस से मुख्यमंत्री आवास तक नियोजित की गई थी और संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री के लिए एक ज्ञापन तैयार किया गया था। इस ज्ञापन में संगठनों ने सूचना दी थी कि देश भर के राजनीतिक पार्टियों द्वारा इस मामले में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए मजबूत बयान दिए हैं और इस साजिशपूर्ण कार्यवाही का विरोध किया है। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री से भी मांग रखी गई कि सुधा भारद्वाज की रिहाई के लिए उपयुक्त कदम उठाएं।
पद यात्रा को खुर्सीपार में रोकने के बाद आंदोलनकारी रायपुर पहुंचे और जय स्तम्भ चौक में गोल घेरा बनाकर प्रदर्शन किया, फिर वहां से पैदल मार्च करते हुए अम्बेडकर चौक पहुंचे, जहां फिर से आम सभा कर रायपुर की जनता को देश में बने प्रजातंत्र के खिलाफ बने वातावरण से अवगत कराकर जनांदोलनों का हिस्सा बनने के लिए अनुरोध किया।


