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शिकायत के बाद जांच शुरू
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 8 दिसंबर। लाखे नगर चौक स्थित पुराने चुंगी नाका के पास नगर निगम की जमीन-क्वार्टर पर पूर्व पार्षद ने कब्जा कर दूकानें बना ली, और फिर उसे बेच दिया। इस फर्जीवाड़े में नगर निगम के मौजूदा के एक पदाधिकारी की भी सांठगांठ रही है। कुछ लोगों की शिकायत के बाद इस पूरे मामले की पड़ताल शुरू हो गई है।
निगम की संपत्ति को बेचने के इस प्रकरण को लेकर जोन आयुक्त चंदन शर्मा ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में सिर्फ इतना ही कहा कि शिकायतों का परीक्षण किया जा रहा है। यह पता लगाया जा रहा है कि संपत्ति निगम की है, अथवा नहीं। बताया गया कि लाखे नगर चौक पर वर्षों पहले एक पुराना चुंगी नाका था। बाद में शहर का विकास होने पर उसे हटा दिया गया, लेकिन निगम की यह जमीन लबे समय तक खाली पड़ी रही। चौराहे की इस कीमती जमीन पर कुछ लोगों की नजर पड़ी और पुराने दस्तावेजों में हेरफेर कराकर उस पर कब्जा कर लिया गया। अब यहां तीन-चार दूकानें बन गई हैं और कब्जाधारी कारोबार भी चलाने लगे हैं।
बताया गया कि पहले दूकान किराए से दिए गए, और फिर बाद में बेच दिया गया। इसके पीछे निगम के एक पूर्व पार्षद की अहम भूमिका रही है। सूत्र बताते हैं कि संपत्ति तो निगम के नाम पर थी, लेकिन रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई। इसमें पटवारी और राजस्व विभाग के लोगों की संलिप्तता रही है। कुछ प्रमुख लोगों ने निगम के मौजूदा पदाधिकारियों और निगम के अफसरों तक को है, लेकिन किसी ने जांच की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की।
चर्चा है कि निगम के प्रमुख पदाधिकारी की पूर्व पार्षद से गहरी छनती है, और इसी वजह से निगम का अमला हाथ नहीं डाल रहा, लेकिन मामला अब तूल पकड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने इस फर्जीवाड़े की जानकारी विपक्ष के नेताओं तक को दी है, और सुबुत भी उपलब्ध कराए हैं। यह मामला विधानसभा में भी उठ सकता है। बहरहाल, आने वाले दिनों में यह मामला गरमा सकता है।


