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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 12 जनवरी। बिलासपुर–जयरामनगर रेलखंड में ट्रेन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। इसी सेक्शन पर भारतीय रेलवे की अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ से सुसज्जित लोकोमोटिव का ट्रायल शुरू किया गया। यह ट्रायल ब्लॉक सेक्शन में लगाए गए प्रोग्राम्ड आरएफआईडी टैग्स की रीडिंग और कवच की कार्यक्षमता को परखने के उद्देश्य से किया गया।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के दौरान कवच की ऑटोमैटिक ब्रेकिंग प्रणाली को असामान्य और अप्रत्याशित परिचालन परिस्थितियों में भी परखा गया, जिसमें यह पूरी तरह सफल रही। इससे यह साफ हो गया है कि जरूरत पड़ने पर यह प्रणाली मानवीय चूक के बिना ट्रेन को स्वतः रोकने में सक्षम है।
गौरतलब है कि 4 नवंबर को इसी बिलासपुर–जयरामनगर सेक्शन में एक भीषण रेल हादसा हुआ था, जब एक पैसेंजर ट्रेन सामने खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में 12 लोगों की मौत हुई थी और करीब 20 यात्री घायल हुए थे। उसी ट्रैक पर कवच का ट्रायल किया गया है।
इन ट्रायल्स की सफलता के साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में कवच तकनीक के औपचारिक रोलआउट की शुरुआत मानी जा रही है। रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नई प्रणाली का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि अन्य रेलखंडों में इसे तेजी से लागू किया जा सके।
ट्रायल के दौरान ट्रेन रनिंग स्टाफ की भी सक्रिय भागीदारी रही। इससे लोको पायलट और परिचालन कर्मचारी विभिन्न परिस्थितियों में कवच की कार्यप्रणाली को समझ पा रहे हैं और इस तकनीक के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र में कवच परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 1,654 करोड़ रुपये है। स्टेशन कवच, लोको कवच, दूरसंचार टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क और अन्य जरूरी अधोसंरचना के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
फिलहाल नागपुर–झारसुगुड़ा खंड में कवच का कार्य प्रगति पर है, जो मुंबई–हावड़ा उच्च घनत्व कॉरिडोर के 614 रूट किलोमीटर को कवर करता है। वहीं वित्तीय वर्ष 2025–26 में नागपुर–गोंदिया खंड (135 रूट किलोमीटर) में कवच लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। अन्य रेलखंडों पर भी काम जारी है।
कवच भारत की राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसका उद्देश्य सिग्नल तोड़ने की घटनाओं, आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्करों को रोकना, गति की निगरानी करना और मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है। इन-कैब सिग्नल डिस्प्ले और जरूरत पड़ने पर स्वचालित ब्रेकिंग के जरिए यह रेल सुरक्षा को मजबूती देता है।


