ताजा खबर

बिना तामझाम 54 कंपनियों से स्टील प्लांट लगाने एमओयू, 10 हजार करोड़ के निवेश पर सहमति
22-Nov-2020 2:43 PM
बिना तामझाम 54 कंपनियों से स्टील प्लांट लगाने  एमओयू, 10 हजार करोड़ के निवेश पर सहमति

   बस्तर और सरगुजा में लगेंगे प्लांट, ज्यादातर निवेशक स्थानीय   

‘छत्तीसगढ़’  विशेष रिपोर्ट- शशांक तिवारी

रायपुर, 22 नवंबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए 10 हजार करोड़ से अधिक के एमओयू हुए हैं। बताया गया कि 54 कंपनियों ने स्टील प्लांट लगाने के लिए सरकार के साथ एमओयू किया है। ये स्टील प्लांट बस्तर से लेकर जशपुर तक में स्थापित किए जाएंगे। खास बात यह है कि ज्यादातर निवेशक छत्तीसगढ़ के हैं, और उनका पहले से ही प्लांट चल रहा है। 

राज्य बनने के बाद स्टील, सीमेंट और बिजली के क्षेत्र में काफी निवेश हुए थे। पिछली सरकार ने कुछ साल पहले इन क्षेत्रों में निवेश पर रोक लगा दी थी। अब सरकार बदलने के बाद स्टील के क्षेत्र में निवेश के द्वार फिर खुले हैं। 

उद्योग विभाग के एडिशनल डायरेक्टर प्रवीण शुक्ला ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि करीब 70 कंपनियों से निवेश के प्रस्ताव मिले थे जिनमें से 54 के साथ एमओयू हो गया है। बस्तर में रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए उद्योग लगाने सरकार ने काफी आकर्षक प्रस्ताव दिए हैं। नई उद्योग नीति में इसके लिए प्रावधान किया गया है। पिछड़े क्षेत्रों (बस्तर और सरगुजा) में उद्योग स्थापना के लिए स्थाई पूंजी निवेश का 50 फीसदी या अधिकतम 1 करोड़ 20 लाख तक और ब्याज अनुदान में 70 फीसदी तक अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। 

नई नीति के बाद स्टील के क्षेत्र में निवेश के लिए लाइन लग गई है।  सारडा ग्रुप, हीरा, नाकोडा सहित छत्तीसगढ़ के तकरीबन सभी प्रमुख स्टील उद्योगों ने नए निवेश के प्रस्ताव दिए हैं, और उनसे एमओयू भी हो गया है। निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी जिंदल स्टील ने भी निवेश के लिए प्रस्ताव दिया है, लेकिन उनसे अभी एमओयू नहीं हो पाया है। कुल मिलाकर 54 कंपनियों ने स्पंज आयरन, रोलिंग मिल, इंटीग्रेडेट स्टील प्लांट के लिए एमओयू किया गया है। एमओयू करने वालों में मुंबई की एक और कोलकाता की दो कंपनियां भी हैं। 

बताया गया कि 18 और निवेश के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। इनमें से ज्यादातर प्लांट बस्तर और सरगुजा में लगाने का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है। उद्योग लगाने के लिए जमीन की कमी नहीं है। दंतेवाड़ा के गीदम में पौने पांच सौ एकड़ जमीन उपलब्ध है। तिल्दा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी जमीन खाली है। पहली बार जशपुर में स्टील प्लांट लगाने के लिए एमओयू किया गया है, अब तक इस क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं लग पाया है। मुख्यमंत्री की पहल पर स्थानीय उद्योगपति नए प्लांट लगाने में काफी रूचि ले रहे हैं। 

उद्योग विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 10 हजार करोड़ से अधिक  के निवेश के प्रस्ताव पर सहमति मिल चुकी है। स्टील के अलावा एक सायकल निर्माता और दवा निर्माण ईकाई लगाने के लिए एक प्रस्ताव पर सहमति हो चुकी है। स्टील के लिए आयरन ओर एनएमडीसी से उपलब्ध होगा। इसके अलावा सीएमडीसी के आयरन ओर खदान भी जल्द शुरू होने वाला है। इससे कच्चे माल की उपलब्धता पर्याप्त रहेगी। ऐसा पहली बार हो रहा है, जब एमओयू के लिए किसी तरह का कोई कार्यक्रम नहीं हो रहा है। उद्योग विभाग और निवेशक के बीच बिना तामझाम के एमओयू किया गया।
 
ग्लोबल इनवेस्टर मीट पर करोड़ों 
खर्च, एक भी उद्योग नहीं लगा...

पिछली सरकार में नया रायपुर में ग्लोबल इनवेस्टर मीट का आयोजन किया गया था। मुंबई-दिल्ली, बैंग्लोर और अन्य जगहों में रोड शो भी आयोजित किया गया था, इस पर करोड़ों रूपए खर्च होने के बाद बाहर से एक भी इनवेस्टर ने यहां निवेश नहीं किया। स्थानीय समूहों ने ही निवेश किया था। 

सरकार ने पिछली अनुभवों को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल इनवेस्टर मीट के आयोजन के बजाए स्थानीय उद्योगपति को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने का फैसला लिया। उन्हें सुविधाएं देने का भी निर्णय लिया गया। इसका अच्छा प्रतिसाद मिलता दिख रहा है। स्थानीय निवेशक प्लांट लगाने की दिशा में काफी आगे आए हैं।


अन्य पोस्ट