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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 2 अक्टूबर। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष नंदकुमार साय ने शुक्रवार को राज्यपाल बनने की अटकलों को खारिज किया, और कहा कि उनकी अब संवैधानिक पदों पर काम करने में रूचि नहीं रह गई है।
श्री साय को प्रदेश कार्यकारिणी में रखा गया है। मगर पार्टी के भीतर इस बात की जमकर चर्चा है कि श्री साय की वरिष्ठता और अनुभव को देखकर उन्हें राज्यपाल बनाया जा सकता है। मगर श्री साय ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि पिछले 10 साल से यह बात सुन रहे हैं, लेकिन उनकी अब संवैधानिक पदों पर काम करने की रूचि नहीं है। वे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष पद पर काम कर चुके हैं।
उन्होंने प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी पर कुछ भी टिप्पणी करने से मना कर दिया। श्री साय ने कहा कि उन्होंने पूरी कार्यकारिणी नहीं देखी है। मुझे भी कार्यकारिणी में रखा गया है, ऐसी जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि वे कार्यकारिणी सदस्य बने हैं, जब भी कार्यकारिणी की बैठक होगी, पार्टी जो भी रूपरेखा तैयार करेगी, उसके अनुसार काम किया जाएगा।
श्री साय ने कार्यकारिणी को लेकर नाराजगी पर भी सीधे कुछ कहने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि वे अभी कोरोना के कारण गांव में ही हैं, लोगों से मेल मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए उन्हें कोई जानकारी नहीं है।


