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पुरूषवादी समाज सुशांत के नाम पर महिलाओं को एक-दूसरे से लड़वा रहा है-अशोक मिश्र
07-Sep-2020 2:20 PM
पुरूषवादी समाज सुशांत के नाम पर महिलाओं को एक-दूसरे से लड़वा रहा है-अशोक मिश्र

जाने-माने लेखक, निर्देशक, नाटककार का कहना है

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 7 सितंबर।
मुम्बई की फिल्मी दुनिया में अभिनेता सुशांत राजपूत की मौत के बाद से चले आ रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, और इस आग में घी डालने के लिए बहुत दूर-दूर से लोग बयान दे रहे हैं। इस पूरे सिलसिले में फिल्मी दुनिया के भीतर से एक जानकार सोच को समझने के लिए इस अखबार ‘छत्तीसगढ़’ ने जाने-माने लेखक-निर्देशक, और नाटककार अशोक मिश्र से बात की। उनका कहना है कि भारत का पुरूष प्रधान समाज एक निहायत ही पुरूष से जुड़े हुए मामले को लेकर ही एक लडक़ी को ही घेरकर मारने पर आमादा है। 

उन्होंने कहा कि यह बात सिर्फ अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की नहीं है जिसे घेरा जा रहा है, यह पुरूषवादी समाज एक दूसरी अभिनेत्री कंगना का भी इस्तेमाल कर रहा है ताकि अपना मकसद पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि एक पुरूष से जुड़े हुए विवाद को लेकर कभी उसकी दोस्त रही अनिता लोखंडे को घेरा गया, फिर रिया चक्रवर्ती को घेरा गया, और अब कंगना रनौत को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि यह समाज की पुरूषवादी सोच, और पुरूषवादी व्यवस्था है जो एक महिला को बदनाम करने के लिए दूसरी महिला का इस्तेमाल कर रही है, और इसी बुरी तरह इस्तेमाल कर रही है कि जब तक यह विवाद निपटेगा, तब तक इनके कॅरियर भी निपट चुके रहेंगे। 

उन्होंने कहा कि आज बवाल खड़ा करने के लिए फिल्मी दुनिया को लेकर नशे का बखेड़ा खड़ा किया जा रहा है, मानो समाज में नशा अकेली फिल्मी दुनिया में ही चलता है। उन्होंने कहा कि कुंभ के मेले से लेकर छत्तीसगढ़ के राजिम के मेले में आने वाले साधुओं को दुनिया गांजा पीते नहीं देखती है क्या? उन्होंने कहा कि साधुओं को तो कई जगह गांजा देने की बात कहकर बुलाया जाता है। अगर गांजे का नशा गैरकानूनी है, और खराब है तो इन साधुओं पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती है जो हर जगह खुलेआम नशा करते हैं। 

अशोक मिश्र ने कहा कि अगर यह समाज महिलाप्रधान होता, उनका दबदबा रहता, उनकी दबंगई चलती, तो पुरूष का इस तरह इस्तेमाल होता। लेकिन हिन्दुस्तान का समाज पुरूषप्रधान है, और सुशांत राजपूत से जुड़ी हुई महिलाओं को एक-एक करके घेरा जा रहा है, और बारी-बारी से बदनाम किया जा रहा है, मारा जा रहा है, और एक-दूसरे के खिलाफ उनसे हमले करवाए जा रहे हैं।
 
उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में पद्मश्री जैसे सरकारी सम्मान देकर लोगों को पहले स्थापित किया जाता है, और फिर ऐसे मौकों पर उनका इस्तेमाल किया जाता है। 


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