ताजा खबर

एक्टिव केस हजार पार, 24 घंटे में 5 मौतें
04-Sep-2020 8:57 AM
एक्टिव केस  हजार पार, 24 घंटे में 5 मौतें

वास्तविक मरीज ज्यादा, सात-आठ दिन देर से मिल रही रिपोर्ट, 27 हजार जांच में से करीब एक चौथाई सैम्पल लम्बित या रिजेक्ट

'छत्तीसगढ़' संवाददाता 

बिलासपुर, 4 सितम्बर। बीते 24 घंटे के भीतर जिले में 140 नये कोरोना मरीज मिलने से एक्टिव केस का आंकड़ा एक हजार पार कर गया। अब संख्या बढ़कर 1050 पहुंच चुकी है। 24 घंटे में पांच लोगों की मौत भी हुई है। मौतों की संख्या 45 पहुंच गई है। इस दौरान 41 मरीज ही स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से डिस्चार्ज किये गये हैं। संक्रमण का दायरा कलेक्टोरेट, थानों, बैंकों तक बढ़ता जा रहा है। बिस्तरों की भारी कमी बनी हुई है, मरीज लौटाये जा रहे हैं। निजी अस्पतालों में भर्ती चालू नहीं हुई है और उन्होंने भी अपनी सीमित क्षमता बता दी है। कल आरपीएफ के आधा दर्जन संक्रमित जवान लौटा दिये गये।

बुधवार को 215 मरीज मिलने के बाद गुरुवार को यहां 140 और नये संक्रमित मरीज पाये गये। शहरी क्षेत्र में ही 86 मरीज मिले हैं। कई ऐसे मरीज हैं जिन्होंने अपने साधनों से ही टेस्ट कराया और होम आइसोलेशन पर इलाज लेना शुरू कर दिया है क्योंकि वे सिम्स में टेस्ट कराने वालों और संभागीय कोविड अस्पताल में भीड़ देखकर घबरा रहे हैं। ऐसे में संक्रमितों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।

कल सिरगिट्टी थाने के 10 जवान एक साथ संक्रमित पाये गये। सिविल लाइन थाने के प्रभारी भी संक्रमित पाये गये हैं। पहले भी सीपत थाने के प्रभारी को संक्रमित पाया गया था, जिन्हें अपनी जान भी गंवानी पड़ी। मल्हार और तखतपुर थाने में भी जवान संक्रमित पाये गये हैं। स्टेट बैंक की कलेक्टोरेट शाखा में तीन स्टाफ संक्रमित मिले जिसके बाद ब्रांच पर ताला लगा दिया गया है। जिला कलेक्टोरेट में अत्यन्त सावधानी से कामकाज किया जा रहा है। यहां कलेक्टर के बाद अधीक्षक और चार अन्य कर्मचारी संक्रमित पाये जा चुके हैं। सिम्स के एक और डॉक्टर के संक्रमित मिलने के बाद यहां अब तक 7 डॉक्टर या जूनियर डॉक्टर संक्रमित हो चुके हैं। दो निजी अस्पताल के डॉक्टरों को भी कोरोना संक्रमित पाया गया। इसके अलावा वार्ड ब्वाय और नर्स भी कोरोना पॉजिटिव पाये जा चुके हैं। हाईकोर्ट में फिर एक कर्मचारी को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। एनटीपीसी सीपत में भी एक कर्मचारी कोरोना से पीड़ित पाया गया। अनेक व्यवसायी और कामकाजी लोग संक्रमित मिले हैं। प्रभावितों में 12 साल के बच्चे से लेकर 92 साल के बुजुर्ग शामिल हैं। प्रभावितों में 38 महिलायें हैं। अब तक 1277 मरीज ठीक हुए हैं।

कई लोग जिला अस्पताल और बिरकोना, भरनी के कोविड सेंटर में जाकर इलाज कराने से घबरा रहे हैं। वहां से निकले कुछ ठीक हुए मरीजों ने बताया कि इन जगहों पर साफ-सफाई और देखभाल की जबरदस्त कमी है साथ ही भर्ती के लिये लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसा स्टाफ और बिस्तरों की कमी के कारण है। कल से कुछ निजी चिकित्सकों ने कोविड-19 के प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार करने का प्रस्ताव देना शुरू किया है। ऐसे मरीज जो होम आइसोलेशन पर हों उन्हें वे दवायें, किट और नर्सिंग सेवा घर पर देने जा रहे हैं। जबकि दो ही निजी अस्पताल अपने यहां बेड तैयार करने के लिये तैयार हुए हैं। आरबी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. आर. पी. मिश्रा का कहना है कि उनके यहां कोरोना बेड तैयार करने में कम से कम तीन दिन लगेंगे। मापदंड के अनुसार बहुत सी तैयारी की जानी है। कई स्टाफ नियमित मरीजों के नहीं आने के कारण छुट्टी पर चले गये हैं। यही हाल महादेव हॉस्पिटल का भी है। डायरेक्टर डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि आज उनके दो या तीन बेड ही शुरू हो पायेंगे। सोमवार से 10-12 तक क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जायेगी।

मरीजों की सैकड़ों की संख्या के बीच यह अतिरिक्त व्यवस्था बहुत कम है। हालत यह है कि गुरुवार को रेलवे पुलिस फोर्स के तीन जवानों को कोरोना संक्रमित होने के बाद जिला अस्पताल लाया गया था। वे दो घंटे तक अस्पताल के बाहर खड़े भर्ती करने की गुहार लगाते रहे लेकिन उन्हें नहीं लिया गया। इसके बाद तीनों जवान वापस लौट आये। अब वे घर पर ही इलाज करायेंगे।

कोरोना केस तेजी से बढ़ने की साफ-साफ एक वजह बताना किसी के लिये भी मुश्किल है लेकिन कुछ बिन्दुओं की ओर गौर किया जा सकता है। अनलॉक के बाद लगभग सभी बाजार-व्यवसाय और दफ्तर खुल गये हैं। इनमें गोल घेरा बनाकर फिजिकल डिस्टेंस रखने, मास्क पहनने, सैनेटाइजर रखने, सीमित संख्या में लोगों को प्रवेश देने जैसे नियमों का पालन अनिवार्य है परंतु इसका कहीं पर भी पालन नहीं हो रहा है। लॉकडाउन तक तो पुलिस ने सख्ती बरती पर जब पूरी भीड़ ही सड़कों पर निकल चुकी है, कार्रवाई करना उसके लिये मुमकिन नहीं हो पा रहा है। ज्यादातर बसें इस समय खाली चल रही हैं पर जिन बसों में भीड़ है उनमें सावधानी के नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। अंत्येष्टि और प्रवासी मजदूरों के लिये इलाहाबाद, बनारस आदि जा रही बसों में क्षमता से अधिक सवारी भी भरे जा रहे हैं। सब्जी बाजार, व्यापार विहार, गोलबाजार जैसी जगहों पर भीड़ इकट्ठी हो रही है पर इसकी चिंता न तो विक्रेताओं को है न ग्राहकों को।

सबसे गंभीर स्थिति सैम्पल कलेक्शन और रिपोर्ट मिलने के बीच की है। कलेक्शन के बाद रिपोर्ट आने में सात-आठ दिन तक की देर हो रही है। सैम्पल लेने के बाद संदिग्ध केस में मरीजों को क्वारांटीन पर रहने कहा जाता है लेकिन इसका कहीं पर पालन नहीं होता और वह व्यक्ति शहर में घूमता पाया जाता है, जब सात दिनों बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तब तक वह अनेक लोगों के सम्पर्क में आ चुका है। ऐसे कई केस आये हैं जिनमें मरीज को कोरोना संक्रमण से छुटकारा मिल गया और उसके बाद रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। मौतों के मामलों में आये दिन ऐसा हो रहा है। किसी मरीज की मौत हो जाने के बाद आनन-फानन में उसकी रिपोर्ट अर्जेंट मंगाई जाती है तो वह पॉजिटिव पाया जाता है।

सीएमएचओ डॉ. प्रमोद महाजन का कहना है कि बहुत ज्यादा सैम्पल आने लगे हैं इसलिये रिपोर्ट तैयार करने में देर हो रही है।

दूसरा पहलू यह भी है कि 4500 से अधिक रिपोर्ट्स की स्थिति क्या है अब तक पता नहीं है। 1050 सैम्पल तो रिजेक्ट हो चुके हैं। इनमें से कौन संक्रमित है या नहीं, पता नहीं चल सका है। 3261 कलेक्शन ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट कई दिनों से नहीं मिली हैं। ये सब मरीज शहर में बिना इलाज कराये ही घूम रहे हैं।

इसके अलावा अनलॉक शुरू होने के बाद बाहर से आने वाले यात्रियों का कोई आंकड़ा तैयार नहीं किया जा रहा है। चाहे वे किसी रेड जोन से आये हों। स्वास्थ्य विभाग की ही कल शाम तैयार रिपोर्ट बताती है कि एक भी यात्री ने अपना कोविड टेस्ट नहीं कराया। आज 4 सितम्बर से यात्री ट्रेनों को शुरू किया जा रहा है जब केस कम थे तो यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग, डिब्बों के सैनेटाइजेशन और सामाजिक दूरी के लिये कई गाइडलाइन बनाये गये थे पर इस बार उसका भी पालन नहीं हो रहा है। रेलवे पीआरओ का इस बारे में कहना है कि जिला प्रशासन को व्यवस्था के लिये लिखा गया है।


अन्य पोस्ट