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काला हाथी मर रहा, सफेद हाथी बना दिया-विपक्ष, सत्ता पक्ष का तीखा पलटवार भी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 26 अगस्त। संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर बुधवार को विधानसभा में गरमा-गरम बहस हुई। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए। विपक्षी सदस्यों ने संसदीय सचिवों के अधिकार को लेकर सर्कुलर जारी करने का आग्रह किया। जनता कांग्रेस के सदस्य धर्मजीत सिंह ने कटाक्ष किया कि काला हाथी मर रहा है, और आपने सफेद हाथी बना दिया है। विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने विपक्षी सदस्यों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले 15 सालों में आपने संसदीय व्यवस्था की किताब नहीं पढ़ी थी, जो संसदीय सचिव की नियुक्ति की थी। उन्होंने कहा कि नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश आए हैं, उसका पालन किया गया है। चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस पर व्यवस्था सुरक्षित रखी है।
प्रश्काल के बाद पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति के खिलाफ मोहम्मद अकबर हाईकोर्ट गए थे। पहले कांग्रेस ने इसका विरोध किया था और अब कांग्रेस सरकार ने संसदीय सचिवों की नियुक्ति की है। इस सिलसिले में स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, क्योंकि यह व्यवस्था का प्रश्न है।
विपक्षी सदस्यों ने कहा कि अखबारों के माध्यम से यह बात सामने आई है कि संसदीय सचिवों को मंत्रालय में कमरा नहीं दिया जाएगा। स्वेच्छानुदान और विधानसभा में जवाब देने का अधिकार भी नहीं होगा। इसको लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि हाईकोर्ट का जो निर्देश आया है, उसी का पालन करते हुए संसदीय सचिव नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि संसदीय सचिव मंत्रियों की सहायता करेंगे।
भाजपा सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि संसदीय सचिवों के बारे में सदन को जानकारी नहीं दी गई है। संसदीय सचिव बनाए गए हैं, तो वह संसदीय प्रक्रियाओं में मंत्रियों की मदद करने के लिए बनाए गए हैं। इस सिलसिले में सदन को जानकारी दी जानी चाहिए कि उनका काम क्या होगा? कौन-कौन से अधिकार उन्हें दिए जाएंगे, सदन में यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री को देनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि रमन सरकार के कार्यकाल में संसदीय सचिव बनाए जाने का कांग्रेस ने विरोध किया था और अब कांग्रेस सरकार ने ही संसदीय सचिव बनाए हैं। इससे पूरे प्रदेश में भ्रम की स्थिति है।
उन्होंने कहा कि सदन में संसदीय सचिवों का परिचय कराना चाहिए था। सदन में इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए थी कि संसदीय सचिवों की वैधानिक स्थिति क्या है? उन्होंने कहा कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और यह मामला वहां लंबित है। ऐसे में फैसला आने तक इंतजार किया जाना चाहिए था। जनता कांग्रेस के सदस्य धर्मजीत सिंह ने कहा कि संसदीय सचिवों का इतिहास काफी खराब रहा है। रमन सरकार ने जितने भी संसदीय सचिव नियुक्त किए थे। उनमें से कोई कोई जीत कर नहीं आया।
श्री सिंह ने कहा कि खुद मोहम्मद अकबर इसको लेकर हाईकोर्ट गए थे। सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लंबित है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए था। विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि संसदीय सचिव मंत्रियों के सहयोग के लिए बनाए गए हैं। मंत्रियों से संसदीय सचिवों का परिचय करा दिया गया है। संसदीय सचिव सदन में जवाब नहीं देंगे, इसलिए उनका सदस्यों से परिचय कराने की जरूरत नहीं है। संसदीय सचिवों को मंत्री का दर्जा भी नहीं है। इसलिए उन्हें यहां परिचय कराने की जरूरत नहीं है। विपक्षी सदस्य संसदीय सचिवों के अधिकारों का सर्कुलर उपलब्ध कराने पर जोर देने लगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विपक्ष की आपत्तियों पर तीखा प्रहार किया। संसदीय कार्यमंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि कोर्ट के फैसले पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती है। इसका पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने प्रतिवाद किया और कहा कि कोर्ट के निर्देशों पर चर्चा की जा सकती है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने व्यवस्था सुरक्षित रख लिया।


