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हाईकोर्ट विखंडन प्रस्ताव विधानसभा कैसे चला गया नहीं पता- रेणु जोगी
23-Aug-2020 10:46 AM
हाईकोर्ट विखंडन प्रस्ताव विधानसभा कैसे चला गया नहीं पता- रेणु जोगी

मीडिया प्रभारी ने दिया था बयान, रायपुर, जगदलपुर, अम्बिकापुर में खंडपीठ का अशासकीय संकल्प लायेंगे

' छत्तीसगढ़ ' संवाददाता

बिलासपुर, 23 अगस्त। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की तीन खंडपीठ गठित करने का विधान सभा  में अशासकीय संकल्प लाने के बयान का भारी विरोध होने के कोटा विधायक डॉ रेणु जोगी अब इससे पलट गई हैं और कहा है कि ऐसा प्रस्ताव उनकी  जानकारी के बिना उनके कार्यालय  से कैसे चला गया उनको  नहीं मालूम।

छत्तीसगढ जनता कांग्रेस की विधायक डॉ  जोगी के कार्यालय से जारी एक बयान में मीडिया प्रमुख इक़बाल अहमद रिजवी ने कहा था 3 साल पहले डॉ  रमन सिंह के कार्यकाल में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष  टी एस सिंहदेव  ने रायपुर, जगदलपुर और अम्बिकापुर  में हाईकोर्ट  की खंडपीठ स्थापित करने का प्रस्ताव  रखा था जो सर्व सम्मति से पारित  भी हुआ था। लेकिन स्वीकृति के बाद तत्कालीन भाजपा  सरकर ने आगे कोई पहल नहीं की और न ही डेढ़ साल बीत जाने के बाद कांग्रेस सरकार ने कोई कदम उठाया। इसे देखते हुए डॉ  जोगी ने उक्त प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के लिये अशासकीय प्रस्ताव विधानसभा के अगले सत्र में लाने के लिये रखा है।

डॉ. जोगी की ओर से यह बयान आने के बाद बिलासपुर के अधिवक्ताओं में रोष फैल गया और उन्होंने इसका विरोध करने और हाईकोर्ट के किसी भी तरह के विखंडन के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दे दी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट प्रैक्टिसिंग बार एसोसियेशन के पदाधिकारी संदीप दुबे, राजेश केशरवानी, गुरुदेव शरण, सलीम काजी आदि अधिवक्ताओं ने कहा कि डॉ. जोगी बिलासपुर जिले की विधायक होने के बावजूद यहां के हितों के विपरीत ऐसा प्रस्ताव ला रही हैं। अभी तक यहां न्यायाधीशों के स्वीकृत पद ही नहीं भरे गये तथापि हाईकोर्ट का कार्य संतोषजनक है। पूर्व में बस्तर में खंडपीठ की मांग की गई थी जिसे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ अमान्य कर चुकी है। सरगुजा से हाईकोर्ट की दूरी मात्र पांच घंटे की तथा राजधानी  रायपुर की डेढ़ घंटे की दूरी है। यदि हाईकोर्ट के विभाजन का कोई प्रयास किया गया तो अधिवक्ता इसके विरोध में आंदोलन करेंगे। राज्य निर्माण के समय बिलासपुर की मांग राजधानी की रही है और हाईकोर्ट के लिये सहमति बनी थी।

जिला कांग्रेस कमेटी तथा अन्य अधिवक्ताओं ने भी इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि विधानसभा में ऐसा कोई प्रस्ताव न लायें जिससे लोगों की भावनायें आहत हों।

इसके बाद डॉ. जोगी ने मीडिया से कहा है कि वे बीते कुछ दिनों से दिल्ली में हैं और ऐसा कोई प्रस्ताव उनके कार्यालय से विधानसभा में कैसे चला गया यह उनकी समझ से परे है।


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