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रेप का आरोप, डॉ. आदिले डीएमई पद से हटाए गए
21-Aug-2020 4:07 PM
रेप का आरोप, डॉ. आदिले  डीएमई पद से हटाए गए

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 अगस्त।
डीएमई डॉ. एसएल आदिले आज पद से हटा दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने एक अनुसूचित जाति महिला कर्मी के रेप के आरोप के बाद यह कार्रवाई की है। रिटायर के बाद डॉ. आदिले का कार्यकाल 6 महीने के लिए संविदा तौर पर और बढ़ाया गया था और उनका यह कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त हो रहा था। डॉ. आदिले पर नियुक्ति और मेडिकल सामानों की खरीदी में भी गड़बड़ी करने का आरोप है।  

जानकारी के मुताबिक बस्तर की रहने वाली महिला ने डॉ. आदिले पर रेप का आरोप लगाया है और इसकी लिखित शिकायत रायपुर एसएसपी और महिला पुलिस से की है। पत्र में कहा गया है कि जब वह 2017 में एक परीक्षा देने रायगढ़ मेडिकल कॉलेज गई थी, तभी उसका डॉ. आदिले से परिचय हुआ था। जनवरी 2018 में जब वह अपने किसी  व्यक्तिगत काम से रायपुर आई थी, तब डॉ. आदिले ने उसे अपने घर बुलाकर उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान उसे चुप रहने की धमकी भी दी गई। 

पीडि़त महिला ने अपनी शिकायत पत्र में यह भी बताया है कि वह गरीब महिला है और वह इस घटना के बाद से लगातार घुटन महसूस कर रही है। कई बार उसने आत्महत्या तक की सोच डाली थी, लेकिन   आरोपी को सजा दिलाने की बात सोचकर वह रुक गई। अब वह खुद को मजबूत करते हुए न्याय के लिए खड़ी हो गई है। उसने चेतावनी दी है कि न्याय न मिलने पर वह आगे कुछ भी कर सकती है और इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। माना जा रहा है कि बलात्कार शिकायत के बाद डॉ. आदिले पर जल्द पुलिस कार्रवाई हो सकती है। 

उल्लेखनीय है कि डॉ. आदिले लंबे समय से विवादित रहे हैं और  उन पर मेडिकल सामानों की खरीदी, कर्मियों की भर्ती से लेकर अलग-अलग तरह की गड़बड़ी के आरोप रहे हैं। उन्होंने रायगढ़ में अपनी पदस्थापना के दौरान बेटे के फर्म को ही सप्लाई का ऑर्डर दे दिया था। उन्होंने इसका भुगतान भी किया। इसकी शिकायत अलग-अलग स्तरों पर की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

आदिले को बचाने की कोशिश भी...
डॉ. आदिले पर अपनी बेटी को गलत तरीके से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के गंभीर आरोप रहे हैं। इसकी शिकायतों की जांच भी हुई। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद आदिले के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी हुई थी।
 
बताया गया कि डॉ. आदिले के खिलाफ इस प्रकरण पर चालान पेश किया जाना है। ईओडब्ल्यू ने इसके लिए विभाग से अनुमति मांगी थी। विभाग ने विधिवत अनुमति दे दी है, बावजूद इसके अब तक चालान पेश नहीं किया जा रहा है। उन्हें बचाने की कोशिश का भी आरोप लग रहा है। 


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