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पंडरी बसस्टैंड कॉम्पलेक्स तोडऩे हाईकोर्ट आदेश, 7 साल से फैसले पर अमल नहीं हुआ, अब निगम को 3 माह मोहलत
18-Aug-2020 6:10 PM
पंडरी बसस्टैंड कॉम्पलेक्स तोडऩे हाईकोर्ट आदेश, 7 साल से फैसले पर अमल नहीं हुआ, अब निगम को 3 माह मोहलत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 18 अगस्त।
पंडरी बस स्टैंड में निर्मित व्यावसायिक कॉम्पलेक्स पर हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा आदेश पारित किया है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि नगर निगम से स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण कार्य हुआ है। यह पहले ही स्पष्ट हो चुका है। कोर्ट ने आदेश पारित किया है कि जितनी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है, उसे जल्द से जल्द हटाया जाए। 

याचिकाकर्ता के वकील आशीष सुराना ने बताया कि  कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने कार्रवाई के लिए नोटिस भी जारी किया था। जिसके खिलाफ प्रमोटर बिल्डर जिला अदालत और बाद में हाईकोर्ट में अपील की थी। दोनों जगहों पर नगर निगम के पक्ष में फैसला आया था।

चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को दो हफ्ते के भीतर नगर निगम के पास भी अभ्यावेदन प्रस्तुत करना होगा। बस स्टैण्ड में अवैध निर्माण के खिलाफ रायपुर के गोविंद बर्मन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने इस बात की जानकारी दी थी कि पंडरी बस स्टैंड में बना कॉम्प्लेक्स अवैध है क्योंकि जितनी जमीन निगम की ओर से आबंटित की गई थी उससे कहीं ज्यादा जमीन पर नक्शे के विपरीत निर्माण किया गया है। 

यह भी बताया गया कि 2013 में भी इस मामले में याचिका लगाई गई थी। उस समय भी कोर्ट ने अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन सात साल बाद भी रायपुर नगर निगम ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। 
 
हाई कोर्ट ने भी माना कि इस याचिका पर फैसला पहले ही यानी 2013 में जारी हो चुका है। याचिका निराकृत हो चुकी है। ऐसे में निगम को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी आदेश दिया कि वे अपना अभ्यावेदन निगम के पास प्रस्तुत करें। क्योंकि 7 साल बाद उसी निराकृत मामले पर सुनवाई की जरूरत है। कोर्ट ने निगम को अभ्यावेदन पर त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश देते हुए जनहित याचिका को निराकृत कर दिया है। 


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