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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 18 अगस्त। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जांजगीर-चांपा जिले के बहेराडीह ग्राम स्थित श्री कृष्णा इंडस्ट्रीज की एक महिला मजदूर गंगोत्री बाई कंवर की मौत पर उसके परिजनों को मुआवजे को लेकर राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं क्षतिपूर्ति राहत पर 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने कहा है।
आयोग ने 11 अगस्त को एक आदेश जारी कर कहा है कि 27 जनवरी 2020 की रिपोर्ट का अवलोकन कर उस पर विचार किया, और छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए निर्देश दिया है कि, क्यों न 2 लाख रुपये का नगद मुआवजा मृतक गंगोत्री बाई कंवर के निकटतम परिजन को दिया जाए? और अनुपालन रिपोर्ट 4 हफ्ते में पेश किया जाए?
जानकारी के मुताबिक यह मामला बजरंग यादव (29)की 12 सितंबर 2018 को सिलिकोसिस से हुई मृत्यु से संबंधित है, जिसकी शिकायत जयगोपाल सोनी ने आयोग से की थी। आयोग ने अपने आदेश 11 अगस्त 2020 में लिखा है कि मृतक मेसर्स श्री कृष्णा इंडस्ट्रीज में काम कर रहा था और फैक्ट्री में स्वास्थ्य-सुरक्षा उपायों का पालन न करने पर वह सिलिकोसिस से संक्रमित हो गया और उसकी मृत्यु हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि 13 अन्य मजदूर जो इसी फैक्ट्री में काम कर रहे थे और सिलिकोसिस से संक्रमित थे।
आयोग ने 27 दिसंबर 2018 को मामले का संज्ञान लिया और राज्य सरकार के मुख्य सचिव को 6 हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा। आयोग ने पूर्व में दी गई रिपोर्ट का अवलोकन करने पर पाया कि मृतक राम कुमार यादव की एनओके को मुआवजे की राहत दी गई है, जबकि मजदूर गंगोत्री बाई कंवर के संबंध में बायोप्सी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। खीक राम यादव बायोप्सी के जांच रिपोर्ट में सिलिकोसिस बीमारी पर किसी टिप्पणी का उल्लेख नहीं किया है और उनके फेफड़ों में कोई जहरीला पदार्थ नहीं पाया गया है।
बताया गया है कि आयोग के निर्देश के अनुपालन में, 27 जनवरी 2020 की एक रिपोर्ट अतिरिक्त सचिव, श्रम विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत की गई है, जिसमें कहा गया है कि मृतक मजदूर, गंगोत्री बाई कंवर की मृत्यु में सिलिकोसिस का कोई उल्लेख नहीं है और गंगोत्री बाई कंवर के बिसरा जांच के दौरान कोई जहरीला रसायन नहीं मिला।


