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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर, 9 अगस्त। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला के बरियों अस्पताल में पदस्थ डॉ. खुशबू सिंह उम्र 38 वर्ष ने शनिवार की देर रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। डॉ.खुशबू सिंह अंबिकापुर नगर के नमनाकला अपने मायके में रहती थी।
पुलिस द्वारा बताया गया कि महिला डॉक्टर ने पंखे से फांसी लगाई है। इसके बाद उसे उतारकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, यहां जांच पश्चात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस को डॉक्टर के कमरे से सुसाइड नोट जैसा कुछ भी नहीं मिला है। डॉक्टर ने किस कारण से आत्महत्या की है, इसका पता अभी नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई थी।
जानकारी के मुताबिक अंबिकापुर नमनाकला निवासी डॉ. खुशबू सिंह शनिवार को ड्यूटी नहीं गई थीं। रात में खाना खाने के बाद वह अपने बेटे के साथ कमरे में सोने चली गई। जबकि परिवार के अन्य सदस्य दूसरे कमरे में सो रहे थे। इसी बीच उसने दुपट्टे से पंखे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रात लगभग 2 बजे बेटे की नींद खुली तो वह दौड़ता हुआ नानी के कमरे में पहुंचा और उसने कहा कि मम्मी को कुछ हो गया है। इसके बाद जब सभी कमरे में पहुंचे तो डॉ. खुशबू को फांसी पर लटका देखा। परिजन उसे आनन-फानन में फांसी से उतारकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जांच पश्चात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर बेटी के आत्महत्या से परिवार वालों में मातम का माहौल है। परिजनों ने बेटी की मौत की सूचना उनके पति व ससुराल के सदस्यों को दे दी है। यह खबर सुनकर वहां भी मातम पसर गया है। ससुराल वाले उत्तरप्रदेश से अंबिकापुर आने रवाना हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर खुशबू सिंह की शादी वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश निवासी इंजीनियर पुनीत सिंह से हुई थी। पति दिल्ली में नौकरी करता है जबकि डॉ. खुशबू अपने मायके अंबिकापुर में 5 वर्षीय बेटे रुद्राक्ष व परिजनों के साथ रहती थी।
परिजनों द्वारा पुलिस को दिए बयान में बताया गया है कि उनके पति का यहां काफी कम आना&जाना होता था जिसके चलते महिला चिकित्सक परेशान रहती थी। पुलिस और भी तथ्यों पर जांच पड़ताल में जुटी हुई थी। समाचार लिखे जाने तक चिकित्सक के आत्महत्या का कोई भी स्पष्ट कारण निकलकर सामने नहीं आ सका था।


