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रायपुर उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है-तहसीलदार
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बैकुंठपुर, 10 जुलाई। कोरिया जिले के बैकुंठपुर के कई पटवारी हल्का में 1949-50 के रिकॉर्ड में दर्ज सरकारी भूमि अचानक भुइयां सॉफ्टवेयर को हैक करके किसी एक व्यक्ति के नाम कर दिया गया है, एक पटवारी ने जब देखा तो उसने मामले की शिकायत तहसीलदार से की।
इस संबंध में तहसीलदार ऋचा सिंह का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है, मामले की जांच के लिए रायपुर के उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है। वहां से इस बात की जानकारी ली जा रही है। पटवारियों के पासवर्ड को किसने हैक किया है, नाम सामने आने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी अनुसार कोरिया जिले के कुछ पटवारी हल्का क्षेत्रों में स्थित सरकारी भूमि एक ही व्यक्ति के नाम पर कब्जे में आ गई। एक सरकारी भूमि वर्ष 2019-20 में सरकारी से निजी कब्जा में आ गई, वहीं बाकी की भूमि में हाल के महीनों में कब्जा दर्ज किया गया है। मामले की जानकारी चेरवा पारा के पटवारी को लगी, हालांकि इसी हल्का की एक सरकारी भूमि वर्ष 2019-20 में निजी कब्जा दर्ज हो चुकी थी, उन्होंने मामले की जानकारी तहसीलदार बैकुंठपुर को दी।
इधर, दूसरे हल्का क्षेत्र में भी इसी तरह का वाक्या सामने आने लगा, कई क्षेत्रों में उसी व्यक्ति का नाम दर्ज है जिसका नाम चेरवापारा की सरकारी भूमि में दर्ज दिख रहा है। चेरवापारा के अलावा दो सरकारी भूमि बैकुंठपुर के ही भण्डार पारा हल्का की भी सामने आई है। इसमें भी जो नाम चेरवापारा की सरकारी भूमि में जिस व्यक्ति का कब्जा दिख रहा है, उसी का नाम भंडारपारा में दिखाई दे रहा है।
कितनी भूमि का कब्जा बदला
चेरवापारा की सरकारी भूमि क्र. 807, 1.2800 हेक्टयर जो छोटे झाड़ के जंगल के नाम से दर्ज है ये मामला वर्ष 2019- 20 में ही बदल दिया गया, तब तक भी प्रशासन और संबंधित पटवारी को इसकी भनक तक नहीं लगी, निजी कब्जा दर्ज हो गया, वहीं बची 9 सरकारी भूमि वर्ष 2020- 21 में कब्जा दर्शाया गया, तब जाकर पटवारी को इसकी जानकारी हुई, और उनसे मामले की जानकारी तहसीलदार बैकुंठपुर को दी। वर्ष 2020-21 में जो कब्जा दर्शायी गयी है उनमें भूमि संख्या 493, 0.3200 हे चरनोई भूमि, 983, 0.3900 हे. छोटे झा? के जंगल की भूमि, 958, 0.6400 छोटे झा? का जंगल, 486, 0.4700 हे. छोटे-बड़े जंगल, 983, 0.3900 हे. चरनोई, 493, 0.3200 हे. चरनोई, 988, 0.5300 हे. चरनोई, 486, 0.4700 छोटे ब?े झा? के जंगल के नाम वाली अब निजी कब्जे में दिखाई दे रही है। जबकि 1949-50 के रिकॉर्ड में ये सभी भूमि सरकारी दर्ज थी और अब एक व्यक्ति के नाम से दर्ज है।
पटवारी ही बदल सकता है नाम
राज्य सरकार का भुइयां सॉफ्टवेयर जिसमे सारे राजस्व भूमि के रिकॉर्ड दर्ज है, इसके लिए हर पटवारी को उसके हल्के के हिसाब से गांव बांटे जाते है और उसका अपना पासवर्ड होता है, जिससे सिर्फ वो ही उसमे जाकर कांट छांट कर सकता है या बदलाव या जोड़ कर सकता है।
अब खंगाल रहे हैं रिकॉर्ड
अब जिले भर के पटवारी अपने अपने हल्का क्षेत्र की सरकारी भूमि का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। कहीं उनके क्षेत्र की सरकारी भूमि पर भी तो किसी ने अपना कब्जा दिखा तो नहीं लिया, पटवारियों को अधिकारियों ने कहा है कि अपने रिकॉर्ड को अच्छे से देखो यदि बदलाव हुआ है तो उसकी जानकारी दो ताकि उसकी गंभीरता से जांच की जा सके।









