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मोदी का चीन को सख्‍त संदेश, लद्दाख में एलएसी की रक्षा के लिए भारत प्रतिबद्ध
03-Jul-2020 11:32 AM
मोदी का चीन को सख्‍त संदेश, लद्दाख में एलएसी की रक्षा के लिए भारत प्रतिबद्ध

लेह, 3 जुलाई। लद्दाख में चल रहे करो या मरो की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चीन को कड़ा संदेश देते हुए अचानक सीधे अग्रिम मोर्चे पर पहुंच गए। पीएम मोदी आज अल सुबह करीब 11 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित नीमू बेस पर पहुंचे। उन्‍होंने सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान पीएम मोदी के साथ सीडीएस बिपिन रावत और सेना प्रमुख भी मौजूद थे। तनाव के बीच प्रधानमंत्री ने अपने इस दौरे से चीन को यह बता दिया कि वह खुद वास्‍तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। 

पीएम मोदी ने अपने इस दौरे के साथ ही चीन को सख्‍त संदेश दिया कि वह चीनी इस नापाक हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्‍पष्‍ट संदेश दे दिया है कि चीन की इंच-इंच बढ़ने की कुटिल चाल साउथ चाइना सी में चल सकती है लेकिन भारत के साथ उसकी दाल नहीं गलने वाली है। भारत चीन को पीछे धकलने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 

उन्‍होंने चीन को यह भी बता दिया कि ड्रैगन जहां अपने सैनिकों की संख्या तक छिपा रहा है, वहीं संकट की इस घड़ी में सेना के साथ न केवल वह बल्कि पूरा देश खड़ा है। पीएम मोदी ने जवानों को यह भी संदेश दिया कि चीन के साथ जारी टकराव लंबा खिंच सकता है और उन्‍हें लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। प्रधानमंत्री ने चीन को यह भी जता दिया है कि वह ड्रैगन के साथ बातचीत को तैयार हैं लेकिन किसी भी आक्रामक कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा। 

रक्षा मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि लद्दाख जाकर प्रधानमंत्री ने बेहतरीन काम किया। उन्‍होंने कहा, 'पीएम मोदी ने लद्दाख के मोर्चे पर जाकर बहुत अच्‍छा किया। इस यात्रा के जरिए भारत ने चीन को यह संदेश दिया है कि वह चीन को पीछे खदेड़ने के लिए दृढ़ संकल्‍प है।' पांच मई को दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध के बाद यह किसी बड़े नेता का पहला लद्दाख दौरा है। हाल ही में सेना प्रमुख जनरल नरवणे लद्दाख के दौरे से लौटे हैं। 

भारत और चीन की सेनाओं के बीच 5 मई से पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में कई जगहों पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। 15 जून की रात को गलवान घाटी में हिंसक झड़पों में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद तनाव और बढ़ गया। इस झड़प में चीन के सैनिक भी हताहत हुए लेकिन पड़ोसी देश ने अभी तक उनकी संख्या नहीं बताई है। 

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के मुताबिक, जब भारतीय सैनिक पीपी-14 के पास पहुंचे थे तो वहां पर बड़ी संख्या में चीनी सैनिक इकट्ठा थे। बातचीत के दौरान ही अचानक चीनी सैनिकों के तंबू में आग लग गई। इसके बाद दोनों देशों के सेनाएं आमने-सामने आ गई। यह खूनी झड़प पूरी रात चलती रही।

दोनों देशों के बीच हो चुकी है तीन दौर की बातचीत
गलवान घाटी में झड़प के बाद दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच दो दौर की बातचीत हुई है। इससे पहले 6 जून को बातचीत हुई थी, जिसमें चीनी सैनिक पीछे हटने के लिए तैयार हो गई थी, लेकिन वह पीछे नहीं गए। नतीजन दोनों देशों के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई।(navbharattimes.indiatimes.com)


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