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हार्ट अटैक की कहानी से छिपाना चाहते थे राज
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 10 जून। दुर्ग जिले के बहुचर्चित संतोष साहू हत्याकांड में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार कोशले की अदालत ने मृतक की पत्नी उमा बाई साहू और उसके सगे भतीजे लोकेश्वर उर्फ लक्की साहू को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। करीब तीन वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 तथा 120-बी के तहत दोषी माना। शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक नंदिनी चंद्रवंशी ने पैरवी की।
अभियोजन के मुताबिक संतोष साहू और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। पति को पत्नी के चरित्र पर संदेह था, जबकि पत्नी का आरोप था कि उसे घर खर्च के लिए पर्याप्त धन नहीं मिलता था। इसी तनाव के बीच उमा बाई ने अपने भतीजे के साथ मिलकर संतोष की हत्या की साजिश रची। 27 मई 2023 की रात संतोष को अधिक मात्रा में शराब पिलाई गई और नशे में सो जाने के बाद चादर और तकिए से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद आरोपियों ने इसे हार्ट अटैक से हुई मौत बताने का प्रयास किया, लेकिन परिजनों को गले पर निशान और घटनास्थल की परिस्थितियां संदिग्ध लगीं। पुलिस जांच में टूटी चूडिय़ों के टुकड़े, महिला के चेहरे पर खरोंच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई। अदालत ने कहा कि भले ही मामले में प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, लेकिन कॉल डिटेल, डिजिटल साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों की श्रृंखला आरोपियों की संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त है। दोनों दोषियों को हत्या और षड्यंत्र के मामलों में अलग-अलग उम्रकैद की सजा तथा अर्थदंड से दंडित किया गया है। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।


