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सुशासन तिहार समीक्षा बैठक में राजस्व प्रकरणों, पेयजल, स्वास्थ्य और खरीफ तैयारियों पर निर्देश
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 5 जून। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सुशासन तिहार का सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव और आम लोगों के बीच स्पष्ट दिखाई दे रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से जनता तक पहुंच रहा है और प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समय पर समाधान करना होना चाहिए।
बिलासपुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। बैठक में विकास कार्यों, राजस्व मामलों, पेयजल व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने राजस्व प्रकरणों पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों और निर्धारित समय-सीमा पार कर चुके प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मामले सीधे आम लोगों के जीवन और आजीविका से जुड़े हैं, इसलिए इनके गुणवत्तापूर्ण और त्वरित निराकरण को प्राथमिकता दी जाए।
गर्मी को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था की सतत निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही मानसून के दौरान संभावित मौसमी बीमारियों की रोकथाम और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग को अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने को कहा।
खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद और बीज की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। डीएपी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए किसानों को एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्पों के उपयोग के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
महिला सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक "ड्रोन दीदी" तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वे अब तक 27 जिलों में आयोजित सुशासन तिहार शिविरों में शामिल होकर सीधे लोगों से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद शिविरों में उमड़ रही भीड़ जनता के बढ़ते विश्वास और सुशासन तिहार की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं की सतत निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान करते हुए कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।


