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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 3 जून। छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बालिकाओं के लगातार लापता होने के मामलों को लेकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 96 हजार से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता हो चुकी हैं। पार्टी ने इस पूरे मामले पर तत्काल श्वेत पत्र जारी करने और विस्तृत जानकारी जनता के सामने रखने की मांग की है।
पार्टी अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि 96 हजार परिवारों की पीड़ा और चिंता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बनी हुई है।
जनता कांग्रेस (जे) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन औसतन 30 महिलाएं लापता होती हैं, जबकि हर दिन 10 से 12 नाबालिग बालिकाओं के गायब होने के मामले सामने आते हैं। यानी लगभग हर दो घंटे में एक बालिका लापता हो रही है।
पार्टी के मुताबिक वर्ष 2019 से 2021 के बीच राज्य में 59,933 महिलाओं और बालिकाओं के लापता होने के मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2023 से जनवरी 2026 तक 36,662 नए मामले सामने आए। इन मामलों में लगभग 32 प्रतिशत मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाने या अपहरण की आशंका दर्ज की गई है, जिसे पार्टी ने मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क से जोड़कर देखा है।
अमित जोगी ने कहा कि उनकी पार्टी ने युवाओं को नशे, अपराध और शोषण से बचाने के लिए बेटा बचाओ अभियान शुरू किया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बेटियों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाए। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें विफलता गंभीर चिंता का विषय है।
पार्टी ने दावा किया कि लापता व्यक्तियों की बरामदगी दर केवल 59.3 प्रतिशत है, जो देश में सबसे कम दरों में शामिल है। साथ ही वर्ष 2001 से 2013 के बीच दर्ज लगभग 65 हजार मामलों में से 26 हजार से अधिक लोग आज भी लापता हैं और उनके परिजन वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
जनता कांग्रेस (जे) ने राज्य सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें लापता महिलाओं और बच्चों पर श्वेत पत्र जारी करना, प्रत्येक मामले की जांच 90 दिनों के भीतर पूरी करना, सभी जिलों में मानव तस्करी निरोधक इकाइयों को सशक्त बनाना, पुराने अनसुलझे मामलों की समीक्षा के लिए विशेष कार्यबल गठित करना, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना तथा मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में इस विषय पर विस्तृत वक्तव्य देकर समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करना शामिल है।
जोगी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए तो जनता कांग्रेस (जे) इस मुद्दे को गांव-गांव और जन-जन तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह विषय केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि सरकार के संवैधानिक दायित्व का प्रश्न है।


