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दुर्ग विवि कुलपति ने वित्त विभाग से मांगा जवाब
रायपुर, 31 मई। दुर्ग विश्वविद्यालय के पुल की एक कार में हुई तोड़ फोड़ के बाद मरम्मत के खर्च के भुगतान को लेकर कुलपति ने लिखित में पूछताछ शुरू कर दी है।
विवि की इस कार में (इटियोस CG 02 6681) व्यक्तिगत झगड़े और मारपीट में सरकारी कार में तोड़फोड़ हुई थी। इसको बनवाने के लिए विश्वविद्यालय के वाहन प्रकोष्ठ के जरिए नोट शीट चलवाई और बताया कि दुर्ग के रायपुर नाका स्थित वाई ब्रिज में गति अवरोधक पर ड्राइवर ने ब्रेक लगाया तभी पीछे से आ रही एक अन्य कार ने विवि की कार को ठोकर मार दी । यह नोटशीट जब कुलपति के समक्ष आई तो उन्होंने दुर्घटना की एफआईआर कराने और बीमा क्लेम करने लिखा । कुलपति की इस टीप के बावजूद न तो एफआईआर करवाई और न ही बीमा क्लेम किया । विवि के अधिकारियों ने वाहन प्रकोष्ठ के जरिए कार की मरम्मत करवाने के बजाय खुद ही कार बनवा ली और 24 हजार का बिल प्रस्तुत किया । कुलपति ने अब वित्त विभाग से इस आहरण की जानकारी मांगी है।
बताया गया है कि विश्वविद्यालय अधिनियम में कार कुलसचिव समेत अन्य अधिकारियों को कार इस्तेमाल करने की पात्रता ही नहीं है, अधिनियम में मात्र पूल कार की पात्रता है। अर्थात कुलसचिव या अन्य अधिकारियों को घर से लाने, ले जाने के लिए ही सरकारी कार दिये जाने की बात कही गई है।
विवि के सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों होटल मैरियट में आयोजित शिक्षा संवाद में शामिल होने विवि के कुछ अधिकारी रायपुर आए थे। कार्यक्रम के बाद शाम सात बजे जब रायपुर से रवाना हुए तो भिलाई में किसी परिचित के घर रुके थे। वहां किसी के साथ विवाद के बाद वे चले गए। उन लोगों ने अपनी कार से विवि की कार का पीछा किया। थोड़ी देर बाद विवि कार, दुर्ग के वाई ब्रिज के नीचे लावारिस छोड़ गए। इससे आक्रोशित उन लोगों ने सारा गुस्सा सरकारी कार पर उतारा और लाठी डंडे और राड से कार में जमकर तोड़फोड़ की थी। इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने पर सारा घटनाक्रम का उल्लेख करना पड़ता इस वजह से कार सवारों ने एफआईआर नहीं करवाया। और बिना एफआईआर के बीमा क्लेम नहीं जा सका।
कुलपति की आपत्ति के बाद विश्वविद्यालय के वाहन प्रकोष्ठ के जरिए नहीं बल्कि विवि के अधिकारियों ने स्वयं ही कार की मरम्मत करवाया और कुछ समय बाद बिल पेश कर भुगतान ले लिया गया। इस पर सबकी निगाहें कुलपति को वित्त विभाग के जवाब पर है।


