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गृह निर्माण मंडल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
रायपुर, 29 मई। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड से फ्लैट पजेशन का इंतज़ार करते-करते आवेदिका श्रीमती गिरिजा सिंह का निधन हो गया, लेकिन उनका सपना अधूरा ही रह गया।
इस मामले ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीमती गिरिजा सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट के लिए निर्धारित राशि समय पर जमा की थी। नियमों के अनुसार उन्हें निश्चित समय-सीमा में आवास उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें फ्लैट नहीं सौंपा गया।
लगातार इंतज़ार, मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता के बीच श्रीमती गिरिजा सिंह की मृत्यु हो गई। उनके पति जब जमा की गई राशि की वापसी की मांग की गई, तो हाउसिंग बोर्ड केवल 2.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से राशि लौटाने की बात कर रहा है। जबकि फ्लैट की शर्तों में स्पष्ट रूप से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज या उससे अधिक देने की बात कही गई थी।
परिवार का यह भी कहना है कि स्वयं हाउसिंग बोर्ड के वकील ने यह स्वीकार किया है कि 7.5 प्रतिशत या उससे अधिक दर से ब्याज दिया जाना न्यायसंगत होगा, इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा कम ब्याज देने की बात कही जा रही है। प्रार्थी द्वारा हाउसिंग बोर्ड और संबंधित सभी आला अधिकारियों के पास 100 से अधिक बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है। ऐसे कई खरीदार परेशान हैं।अब देखना यह होगा कि क्या बोर्ड प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।


