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मुख्य सचिव कमेटी की बैठक
छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 27 मई। सरकार ने प्रदेशभर में सरकारी विभागों, निगम-मंडलों, कंपनियों और बोर्डों की अनुपयोगी एवं खाली पड़ी जमीनों के व्यवस्थित विकास और सदुपयोग के लिए व्यापक रिडेवलपमेंट कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
इस सिलसिले में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभागों के अफसरों और जिला कलेक्टरों से चिन्हित शासकीय भूमि की जानकारी ली गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि लंबे समय से खाली पड़ी सरकारी जमीनों से न शासन को राजस्व मिल रहा है और न ही जनता को कोई लाभ हो रहा है। रिडेवलपमेंट योजना से शहरों का नियोजित विकास होगा और सरकारी परिसंपत्तियों का मूल्य भी बढ़ेगा।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी खाली शासकीय जमीनों का केंद्रीय डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया जाएगा। जीआईएस मैपिंग के माध्यम से जमीनों की लोकेशन, रकबा और वर्तमान स्थिति का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा। शहरों की प्रमुख लोकेशन पर स्थित जमीनों पर आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग और नए सरकारी कार्यालय विकसित किए जाएंगे।
बताया गया कि बड़ी जमीनों के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल अपनाने का भी निर्णय लिया गया है, जिससे शासन को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों पर कृषि, उद्यानिकी, आधुनिक वेयरहाउस और कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
योजना के तहत जर्जर और अनुपयोगी शासकीय भवनों को चिन्हित कर उन्हें हटाया जाएगा तथा उनकी जगह आधुनिक सुविधायुक्त नए भवन बनाए जाएंगे। साथ ही खाली जमीनों पर अवैध कब्जा रोकने के लिए फेंसिंग और शासकीय स्वामित्व संबंधी बोर्ड लगाए जाएंगे। निगरानी के लिए राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से कार्रवाई करेंगे।
बैठक में विधि विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, गृह एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त अवनीश शरण, एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी संभागायुक्त और कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़े।


