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नयी दिल्ली, 23 मई। छत्तीसगढ़ के सुदूर बस्तर क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय से आदिवासी समुदायों को स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सहायता प्रदान कर रहे पति-पत्नी डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले को 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
वर्ष 1990 में विवाह के तुरंत बाद गोडबोले दंपति बस्तर पहुंच गए और तब से उन्होंने अपना जीवन दुर्गम व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी आबादी की सेवा में समर्पित कर दिया, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं या तो सीमित थीं या न के बराबर थीं।
महाराष्ट्र के सतारा जिले से बीएएमएस की डिग्री प्राप्त करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले ने बस्तर पहुंचने से पहले वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से नासिक में आदिवासी समुदायों के बीच काम किया।
उन्होंने बाद में दंतेवाड़ा जिले के बारसुर में अबूझमाड़ जंगल के पास एक क्लिनिक खोला, जहां उन्होंने गंभीर रूप से बीमार हजारों आदिवासी रोगियों का इलाज किया, जो अक्सर चिकित्सा देखभाल के लिए घने जंगलों से होकर लंबी दूरी तय करते थे।
पिछले 15 वर्षों में उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से दूरदराज के वन क्षेत्रों में 100 से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगाये और 9,000 से अधिक रोगियों की चिकित्सा जांच व उपचार किया।
कई गंभीर रूप से बीमार रोगियों को उन्नत उपचार के लिए दंतेवाड़ा और रायपुर के अस्पतालों में भेजा गया।
पुणे से समाज कार्य में स्नातकोत्तर सुनीता गोडबोले ने आदिवासी महिलाओं और बच्चों के साथ निरंतर जमीनी स्तर पर जुड़कर चिकित्सा योजनाओं को और मजबूत किया।
स्थानीय आदिवासी भाषाओं गोंडी और हल्बी में पारंगत दंपति ने पोषण, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया।
आदिवासी बच्चों में कुपोषण से निपटने के उनके प्रयासों से बस्तर के दर्जनों गांवों में सैकड़ों बच्चों को लाभ हुआ है।
उन्होंने महिलाओं के लिए पोषण व आत्मनिर्भरता पर प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए और ‘सिकल सेल एनीमिया’ जैसी समस्याओं पर जागरूकता अभियान चलाया।
दंपति को पहले भी सामाजिक सेवा के लिए कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 2001 में पुणे के नाटू प्रतिष्ठान द्वारा दिया गया ‘सेवा गौरव’ पुरस्कार भी शामिल है। (भाषा)


