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पश्चिम एशिया संकट का असर, खाद वितरण का नया फार्मूला
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 मई। पश्चिम एशिया संकट का खाद आयात पर असर पड़ा है। इसके चलते खाद की किल्लत शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों को सीमित मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाएगी। विकल्प के तौर पर जैविक खाद का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने सहकारी क्षेत्र में उर्वरक वितरण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उप सचिव विकास मिश्रा के हस्ताक्षर से जारी आदेश में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और नैनो उर्वरकों को वैकल्पिक रूप से बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
यह कहा गया कि खरीफ 2025 में किसानों को वितरित यूरिया की 80 प्रतिशत और डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा ही खरीफ 2026 में दी जाएगी। यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा पारंपरिक यूरिया उपलब्ध होने पर वितरित की जाएगी, अन्यथा नैनो यूरिया के रूप में दी जाएगी। वहीं डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा अन्य वैकल्पिक एनपीके उर्वरकों अथवा नैनो डीएपी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
विभाग ने यह भी साफ किया है कि किसी भी परिस्थिति में किसानों को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग पूरी तरह वैकल्पिक रहेगा।
आदेश में किसान श्रेणी के अनुसार उर्वरक वितरण की व्यवस्था तय की गई है। 2.5 एकड़ तक भूमि वाले सीमांत किसानों को निर्धारित मात्रा एकमुश्त दी जाएगी। 2.5 से 5 एकड़ तक भूमि वाले लघु किसानों को यूरिया दो किस्तों में मिलेगा, जिसमें दूसरी किस्त 20 दिन बाद दी जाएगी। वहीं 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े किसानों को यूरिया तीन किस्तों में दिया जाएगा और प्रत्येक किस्त के बीच 20 दिन का अंतर रहेगा।
विभाग ने कहा है कि किसानों को उर्वरक की मात्रा बोरी की गणना के आधार पर तय की जाएगी। खरीफ 2025 में वितरित उर्वरकों की बोरी संख्या के आधार पर ही यूरिया के लिए 80 प्रतिशत और डीएपी के लिए 60 प्रतिशत की गणना की जाएगी। यदि गणना में पूर्णांक संख्या नहीं आती है तो निकटतम पूर्णांक को मान्य किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। इसके तहत रासायनिक उर्वरकों के साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद और हरी खाद के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। शासन का कहना है कि इससे खेती की लागत कम होगी, भूमि की उर्वरा शक्ति सुरक्षित रहेगी और उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग पर रोक लगेगी।
यह आदेश संचालक कृषि, सभी संभागीय आयुक्तों, मार्कफेड, अपेक्स बैंक, सभी कलेक्टरों, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, संयुक्त संचालक कृषि और जिला उप संचालक कृषि को भेजा गया है।


