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तीन महीने में दूसरी बड़ी कार्रवाई, नदी प्रदूषित और दो इकाईयां भी बंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा, 21 मई। कोरबा स्थित हसदेव थर्मल पावर प्लांट के नवागांव ऐश डैम में दरार और राखयुक्त पानी के बहाव के मामले में सिंचाई विभाग ने 20.34 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। हसदेव नदी के प्रदूषित होने के कारण यह कार्रवाई की गई है। खास बात यह है कि इसी डैम से रिसाव के मामले में मार्च महीने में भी 18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। लगातार दूसरी कार्रवाई ने प्लांट प्रबंधन की कार्यप्रणाली और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार 19 अप्रैल को झाबू ऐश डैम में दरार आने के बाद बड़ी मात्रा में राख मिला पानी बहते हुए हसदेव दर्री बैराज तक पहुंच गया था। स्थिति बिगड़ने पर बैराज के गेट लगातार पांच दिनों तक खुले रखने पड़े, ताकि दूषित पानी नदी में छोड़ा जा सके। इस पूरी घटना से करीब 4.52 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी प्रभावित हुआ।
हसदेव दर्री बैराज के अफसरों ने बताया कि बिजली उत्पादन कंपनी और सिंचाई विभाग के बीच पहले से हुए समझौते के अनुसार प्रति क्यूबिक मीटर 15 रुपये जलकर निर्धारित है। नियमों के तहत इसकी तीन गुना तक पेनाल्टी लगाई जा सकती है। इसी आधार पर 20.34 करोड़ रुपये का जुर्माना तय किया गया।
घटना के तुरंत बाद प्लांट की 210-210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट 3 और 4 को बंद करना पड़ा। पिछले 24 दिनों से दोनों यूनिटों में बिजली उत्पादन ठप है। मरम्मत कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिससे उत्पादन शुरू होने की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही।
मामला सामने आने के बाद बिजली उत्पादन कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन ने एचटीपीपी में पदस्थ अधीक्षण अभियंता का तबादला रायपुर कर दिया है। वहीं सहायक अभियंता सिकरेल कंवर और कार्यपालन अभियंता नारायण पटेल को निलंबित किया गया है।
हालांकि रखरखाव का जिम्मा संभाल रही ठेका कंपनी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, कलेक्टर कुणाल दुदावत की जांच समिति ने उत्पादन कंपनी की लापरवाही को जिम्मेदार माना है।
मालूम हो कि प्रदेश में इस वर्ष बिजली की अधिकतम मांग 7200 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। पिछले साल की तुलना में बिजली खपत में 7.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भीषण गर्मी के बीच मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि दूसरी ओर एचटीपीपी की दो बड़ी यूनिट बंद होने से उत्पादन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
मालूम हो कि ग्राम झाबू (लोतलोता के पास) में हसदेव थर्मल पावर प्लांट का राखड़ बांध स्थित है। बांध पुराना और भर जाने के कारण अत्यधिक दबाव से उसका तटबंध अचानक टूट गया, जिससे पानी मिश्रित राख का सैलाब गांवों और खेतों में बह निकला। इस दुर्घटना में राख और मलबे में दबने से एक जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर कश्यप की मौत हो गई थी।


