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नक्सल उन्मूलन में कांग्रेस सरकार का नहीं रहा सहयोग -शाह
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जगदलपुर/रायपुर, 19 मई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने मंगलवार को बस्तर में सुरक्षा बलों के 70 कैंपों को ‘वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ में तब्दील करने की योजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इन सेवा डेरों के माध्यम से सरकार को गांव-गांव और लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है, ताकि केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे।
मीडिया से चर्चा करते हुए शाह ने कहा कि आज पूरे बस्तर से भय का माहौल समाप्त हो चुका है और क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर के सफर में कई महत्वपूर्ण तिथियां रही हैं। 13 दिसंबर 2023 को के नेतृत्व में प्रदेश में सरकार बनने के बाद नक्सल उन्मूलन अभियान को नई गति मिली।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने नक्सल विरोधी अभियान में अपेक्षित सहयोग नहीं दिया, जबकि भाजपा सरकार ने इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया। शाह ने कहा कि 24 मई 2024 को राज्यों के डीजीपी सम्मेलन में 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन सुरक्षा बलों के पराक्रम और संयुक्त प्रयासों से यह लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया गया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब नक्सलबाड़ी आंदोलन शुरू हुआ था, तब यह तर्क दिया जाता था कि विकास नहीं होने के कारण नक्सलवाद फैला। जबकि वास्तविकता यह है कि नक्सलवाद ही विकास में सबसे बड़ी बाधा बना। उन्होंने कहा कि बस्तर लंबे समय तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ‘संपूर्ण विकास की परिक्रमा’ शुरू हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि बस्तर में करीब 200 सुरक्षा कैंप हैं, जहां सुरक्षा बल क्षेत्र की सुरक्षा में तैनात रहे। अब इनमें से एक-तिहाई यानी 70 कैंपों को ‘वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदला जा रहा है। इन केंद्रों पर बैंकिंग सुविधा, आधार कार्ड निर्माण, डिजिटल सेवाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
शाह ने कहा कि विकास से वंचित रहे लोगों तक सरकार की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाया जाएगा। बस्तर को आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाया जाएगा और यहां सिंचाई, कौशल विकास तथा रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
उन्होंने घोषणा की कि प्रत्येक आदिवासी परिवार को एक गाय और एक भैंस उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से अगले छह महीनों में बस्तर में डेयरी नेटवर्क का बड़ा मॉडल विकसित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सलमुक्त, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान बनाएगा।
2031 तक बस्तर बनेगा विकसित संभाग...
पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि गुंडाधुर डेरा सेवा केंद्र बस्तर के विकास का लोकतांत्रिक मॉडल होगा। अब बस्तरवासियों को भय से जीने की जरूरत नहीं। यहां युवा, महिलाएं विश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं। भारत और छत्तीसगढ़ सरकार उनके साथ हैं। उन्होंने सरेंडर नक्सलियों के हृदय परिवर्तन को रोकने के लिए किए गए उपाय पर बताया कि इनके लिए 20 करोड़ का खर्च कर एक सेंटर बनाया है, जहां उन्हें कौशल उन्नयन के साथ पढ़ाई-लिखाई और मनोवैज्ञानिक ट्रिटमेंट भी दिया जा रहा है। भविष्य में वे लोग परिवार के साथ रह सके इसकी व्यवस्था की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भटकाने के लिए लोग नाम, भेष और बाते बदलकर आ सकते हैं उन पर भरोसा न करें। उससे पहले ऐसे लोगों से 50 वर्ष के नुकसान का हिसाब मांगें। उन्होंने यह भी कहा हिंसा से किसी व्यक्ति, क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता। यह नक्सलवाद गरीबी के कारण फैला था। इसे दूर करने गृह मंत्रालय ने एक बड़ा रोडमैप बनाया है। शाह ने कहा 2031 तक बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवास संभाग बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।
मध्य क्षेत्र परिषद में सुरक्षा-विकास योजनाओं, और समन्वय पर जोर
मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक मंगलवार को शुरू हुई। बैठक के शुरूआत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का पुष्पगुच्छ एवं बस्तर की पारंपरिक बेल मेटल कला से निर्मित प्रभु श्रीराम की प्रतिमा भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। बैठक में सुरक्षा, और विकास योजनाओं व राज्यों के बीच समन्वय पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के दृढ़ नेतृत्व, स्पष्ट नीति और संकल्पित प्रयासों के कारण बस्तर आज नक्सलवाद के दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि पांच दशकों तक नक्सलवाद के कारण मुख्यधारा के विकास से अछूते रहे बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और विश्वास का विषय है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी आत्मीय स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा बस्तर आज शांति, सुरक्षा और सुशासन के नए विश्वास के साथ देश के सामने सकारात्मक परिवर्तन की मिसाल बनकर उभर रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पर्यटन की अपार संभावनाओं से समृद्ध यह अंचल अब नए आत्मविश्वास के साथ विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक बस्तर सहित पूरे क्षेत्र में पर्यटन, आधारभूत विकास, जनभागीदारी, बेहतर समन्वय और जनकल्याण की दिशा में नई संभावनाओं को गति प्रदान करेगी तथा बस्तर की नई पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगी।


