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चीन पहुंचे हुए अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प इसे दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी बैठक करार दे रहे हैं, और चीनी राष्ट्रपति की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं। बाकी पूरी दुनिया के लिए एक बिफरे हुए जानवर सरीखा ट्रम्पियापा चीन के साथ बात करते हुए एक बिल्कुल ही सभ्य, शिष्ट, और शालीन बच्चे सरीखा हो गया है। अनगिनत कार्टूनिस्टों ने चीन के साथ बर्ताव करते ट्रम्प को चीनी राष्ट्रपति के मुकाबले बौने कद का बताया है, या छोटे बच्चे की तरह बताया है। और पूरी की पूरी दुनिया पिछले एक या दो दिन राहत की सांस ले रही है क्योंकि चीनी हवा में सांस लेते हुए ट्रम्प का यह हौसला नहीं था, यह औकात नहीं थी कि वह दुनिया में किसी को भी धमकी जारी कर सके। पिछले दो दिन दुनिया की हवा ट्रम्प के किसी ताजा जहर से मुक्त रही। सत्ता पर आने के बाद से अब तक पहली बार ट्रम्प का बर्ताव एक इंसान की तरह का रहा, जो कि दुनिया की एक बहुत बड़ी ताकत, चीन के सामने हाथ बांधे, और हाथ जोड़े खड़ा हुआ था। हालत यह है कि जब मीडिया ने इन दोनों नेताओं की मौजूदगी में ट्रम्प से चीनी दावे वाले एक अलग देश ताइवान के बारे में अमरीकी नीति पर सवाल किए, तो ट्रम्प ने चिकने घड़े की तरह सवाल के एक-एक शब्द को बह जाने दिया, उस पर कुछ भी नहीं कहा। जिस ताइवान पर चीनी दावे को नकारते हुए अमरीका लंबे समय से चीनी हमले की नौबत में ताइवान की फौजी मदद की नीति बताते आया है, अभी ट्रम्प इस बारे में सवाल पूछने पर वहां से चुपचाप निकल लिए। कुछ पश्चिमी विश्लेषकों ने यह लिखा है कि ट्रम्प चीन में असामान्य रूप से काबू में थे, अपना मिजाज ठीक रखा, चुप्पी रखी, सवालों को टाला, और चीन से अपने कुख्यात तेवर दिखाए भी नहीं।
ट्रम्प का यह कार्यकाल शुरू होने के बाद के इस सवा साल में दुनिया में ऐसा और कोई बदलाव नहीं हुआ है कि चीन की ताकत रातों-रात बढ़ गई हो। दूसरी तरफ यह जरूर हुआ है, और लगातार होते और बढ़ते चल रहा है कि अमरीका ट्रम्प की बददिमागी, और बेदिमागी की वजह से दुनिया भर में अपनी ताकत और रिश्ते, दोनों ही खोते चल रहा है। आज नाटो का सदस्य और अघोषित सबसे ताकतवर देश होने के बाद भी नाटो के भीतर अमरीका अलग-थलग है, पश्चिम के देशों से परंपरागत रिश्तों और घरोबे के बावजूद ट्रम्प ने हर किसी से पंगा लिया हुआ है। इजराइल के चक्कर में ट्रम्प ने ईरान पर जो हमला बोला है, उसकी वजह से अमरीका खोखला होते चल रहा है, दुनिया भर की अर्थव्यवस्था चौपट हो चली है, और दुनिया के इस अघोषित और स्वघोषित माफिया-सरदार को ईरान में ऐसी मुंह की खानी पड़ी है, कि मुम्बई में दाऊद इब्राहिम को किसी मोहल्ले के छोकरे ने जूते लगा दिए हों। दुनिया की सबसे बड़ी फौजी महाशक्ति ईरान में जाकर ऐसी उलझी है कि ट्रम्प में दिन में चार-चार बार समझौते की डील करने के लिए धमकाने के अंदाज में गिड़गिड़ा रहा है, और गिड़ागिड़ाने के अंदाज में धमका रहा है। अमरीकी मनोवैज्ञानिकों के सामने ट्रम्प वहां के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती, और सबसे बड़ी पहेली बन गया है कि इसके दिमाग को क्या माना जाए? पूरी दुनिया में अमरीका ने दशकों से जो सामाजिक मदद दे देकर मुखिया की एक साख बनाई थी, एक परले दर्जे के घटिया और मुनाफाखोर कारोबारी के अंदाज में ट्रम्प ने दुनिया के जरूरतमंद लोगों के भले के हर काम से अपनी भागीदारी को खत्म कर दिया था। अब इजराइल को छोडक़र, अपने मंत्रिमंडल के एक-दो युद्धोन्मादी और साम्प्रदायिक मंत्रियों को छोडक़र, बेटों और दामाद को छोडक़र, ट्रम्प के साथ उसका साया भी नहीं बचा है। इस तरह यह आज दुनिया का सबसे अकेला, और सबसे बेसहारा नेता बन गया है। इस अमरीका में ही अब ये सवाल उठने लगे हैं कि आगे किसी फौजी हमले का हुक्म देने पर फौज उसे माने, या फिर यह देखे कि ये हुक्म युद्ध-अपराध के दर्जे में तो नहीं आएगा? अमरीका में यह बहस भी चल रही है कि अगर ट्रम्प परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का हुक्म देगा, तो क्या उसकी दिमागी हालत देखते हुए फौज उसके हुक्म को माने या न माने?
दूसरी तरफ उस चीन को देखें जिसके सामने आज ट्रम्प एक मेमने की तरह सीधा और मासूम बनकर खड़ा है, चीनी राष्ट्रपति शी को अपना महान दोस्त बतला रहा है, और कह रहा है कि इस दोस्ती पर उसे गर्व है। दुनिया में अमरीका जिस चीन को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता था, जिस पर उसने तरह-तरह की आर्थिक रोक भी लगाई हुई थी, उसके बारे में वहां जाकर ट्रम्प ने कहा कि शी एक महान नेता हैं। रूबरू कहा- आपका मित्र होना मेरे लिए सम्मान की बात है, चीन और आपके लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है। शी की तारीफ करते हुए ट्रम्प ने कहा कि हॉलीवुड में भी शी जैसा कोई आदमी नहीं मिलेगा। बदजुबान ट्रम्प ने शी के लिए शानदार, मेरा दोस्त, बहुत स्मार्ट, बहुत ताकतवर जैसे अनगिनत विशेषणों का इस्तेमाल किया। अच्छा हुआ, ऊंट पहाड़ के नीचे से होकर आ गया, तो अब कुछ दिन बाकी दुनिया में जहां भी रहेगा, बददिमागी कुछ कम रहेगी, अपनी औकात याद रहेगी।
दूसरी तरफ जिस चीन पर अमरीका ने कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, टेक्नॉलॉजी देने पर रोक लगाई थी, एआई के लिए चिप तक बेचने पर रोक लगाई थी, उस चीन ने अपने दम पर एक बुलंद अर्थव्यवस्था खड़ी की है। वह दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है, सबसे बड़ा कारोबारी है, कच्चे माल का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, वैश्विक अर्थव्यवस्था का वह सबसे बड़ा स्तंभ है। आज चीन के बिना बाकी दुनिया के कारखाने और कारोबार थम जाएंगे। चीन ने बीते दशकों में अपनी फौजी ताकत लगातार बढ़ाई है, और किसी नाजायज और गैरजरूरी जंग में इसकी बर्बादी नहीं की है। अमरीका ट्रम्प के आने के पहले से यूक्रेन के मोर्चे पर अपने को झोंके हुए था, और अंतहीन हथियार सप्लाई किए चले जा रहा था। फिलीस्तीन पर बरसाने के लिए इजराइल को बम देने के साथ-साथ अब वह इजराइल का पिट्ठू बनकर ईरान पर अमरीकी फौजी ताकत बर्बाद किए चले जा रहा है। इन सबने अमरीकी अर्थव्यवस्था को खोखला किया हुआ है, और दूसरी तरफ चीन है कि वह अपने धंधों से अपनी कमाई का टकसाल चला रहा है। एक बेदिमाग और बददिमाग नेता किस तरह पूरी दुनिया में अपनी बर्बादी कर सकता है, इसकी बेमिसाल मिसाल ट्रम्प है। हम पहाड़ के नीचे पहुंचे हुए ऊंट का जिक्र करते हुए मासूम ऊंट की बेइज्जती करने के लिए माफी चाहते हैं, लेकिन एक प्रचलित कहावत ट्रम्प पर पूरी तरह से लागू होती है। अपनी औकात जानकर घर लौटा हुआ ट्रम्प बेइज्जती का बदला निकालने के लिए बाकी दुनिया को परेशान करेगा, ईरान पर और हमला करेगा, या फिर ईरान के मोर्चे पर अपनी इज्जत बचाने के लिए युद्धविराम और समझौते के लिए चीन के सामने गिड़गिड़ाहट के असर की राह देखेगा? देखना है कि ट्रम्प क्या देखता है, और क्या दिखाता है।


