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जींस-टीशर्ट पहनकर हाईकोर्ट पहुंचे डिप्टी कमिश्नर पर अदालत नाराज
15-May-2026 1:38 PM
जींस-टीशर्ट पहनकर हाईकोर्ट पहुंचे डिप्टी कमिश्नर पर अदालत नाराज

कोर्ट ने पूछा- क्या यही आपका ड्रेस कोड है?,

भविष्य में निर्धारित वेशभूषा में पेश होने का दिया निर्देश
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 15 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर को अदालत में निर्धारित गरिमामय वेशभूषा में उपस्थित नहीं होने पर कड़ी फटकार लगाई। जींस और टी-शर्ट पहनकर कोर्ट पहुंचे अधिकारी को देखकर अदालत ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या आपको यह भी जानकारी नहीं है कि हाईकोर्ट में किस तरह उपस्थित होना चाहिए? क्या यही आपका ड्रेस कोड है?

भिलाई नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर एक सुनवाई में जवाब देना था। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अपरिहार्य कारणों से निगम आयुक्त उपस्थित नहीं हो सके और उनकी जगह डिप्टी कमिश्नर अदालत में मौजूद हैं।

इस पर अदालत ने पहले देरी से उपस्थित होने को लेकर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद निर्धारित समय पर उपस्थित क्यों नहीं हुए। अदालत ने टिप्पणी की कि सुनवाई केवल अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण बाधित हो रही है।

इसी दौरान जब अदालत की नजर अधिकारी की वेशभूषा पर पड़ी तो न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने पूछा, आप कौन हैं? अधिकारी ने अपना परिचय डिप्टी कमिश्नर के रूप में दिया। इसके बाद अदालत ने कहा, क्या आपको यह भी नहीं पता कि हाईकोर्ट में किस ड्रेस कोड के साथ पेश होना चाहिए? क्या जैसे मन हुआ वैसे ही चले आए?

अदालत ने अधिकारी से यह भी पूछा कि वे पदोन्नति से आए अधिकारी हैं या प्रत्यक्ष भर्ती के जरिए नियुक्त हुए हैं। जवाब में अधिकारी ने बताया कि वे राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। इसके बाद अदालत ने उन्हें भविष्य में उचित और गरिमामय वेशभूषा में ही अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए।

दरअसल, इससे पहले भी हाईकोर्ट सरकारी अधिकारियों के भड़कीले और अनुपयुक्त कपड़ों में अदालत पहुंचने पर नाराजगी जता चुका है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 26 अप्रैल 2018 को सभी कलेक्टरों को आदेश जारी कर पुरुष और महिला अधिकारियों के लिए अदालत में शालीन और गरिमापूर्ण पोशाक अनिवार्य करने के निर्देश दिए थे।

सरकारी आदेश में कहा गया था कि अधिकारियों की वेशभूषा उनके पद की गरिमा, कार्य के प्रति गंभीरता और प्रशासनिक अनुशासन को दर्शानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।


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