ताजा खबर

जमानत याचिकाओं में पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि बताना होगा जरूरी
15-May-2026 12:23 PM
जमानत याचिकाओं में पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि बताना होगा जरूरी

हाईकोर्ट ने जारी की अधिसूचना

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 15 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत और नियमित जमानत याचिकाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विस्तृत बनाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव द्वारा जारी अधिसूचना को राजपत्र में भी प्रकाशित कर दिया गया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

नई अधिसूचना के अनुसार अब जमानत मांगने वाले आवेदकों को अपने प्रकरण की पूरी स्थिति अदालत के सामने स्पष्ट रूप से बतानी होगी। इसमें यह जानकारी देना जरूरी होगा कि मामले की जांच किस चरण में है, चालान पेश हुआ है या नहीं और ट्रायल की वर्तमान स्थिति क्या है।

इसके अलावा आवेदक को यह भी बताना होगा कि मामले में कुल कितने गवाह हैं और अब तक कितने गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अदालत ने जमानत याचिका के साथ दी जाने वाली जानकारी को छह अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने आवेदकों की आपराधिक पृष्ठभूमि का खुलासा भी अनिवार्य कर दिया है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ अन्य मामले दर्ज हैं तो उसे एक चार्ट प्रस्तुत करना होगा, जिसमें एफआईआर नंबर, संबंधित धाराएं और हर मामले की वर्तमान स्थिति का उल्लेख करना होगा। यह भी बताना होगा कि मामला लंबित है, आरोपी बरी हुआ है या उसे सजा मिली है।

नई व्यवस्था के तहत संबंधित मामले में पहले दाखिल की गई जमानत याचिकाओं और उनके परिणाम की जानकारी देना भी जरूरी होगा। नियमित और अग्रिम दोनों तरह की जमानत याचिकाओं में एफआईआर नंबर, तारीख, थाना और जिला बताने के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि पुलिस ने किन धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है और उन धाराओं में अधिकतम सजा क्या निर्धारित है।


नियमित जमानत याचिकाओं में आरोपी को अपनी गिरफ्तारी की तारीख और अब तक जेल में बिताई गई अवधि का उल्लेख भी करना होगा। साथ ही यह जानकारी देना भी अनिवार्य होगा कि क्या कभी उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था या उसे भगोड़ा घोषित किया गया था।

 


अन्य पोस्ट