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-विष्णुकांत तिवारी
भोपाल के गौतम नगर इलाके के एक होटल के बाहर भीड़ जमा थी. कुछ लोग एक युवक को पकड़कर बाहर ला रहे थे.
वीडियो में युवक के साथ सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार होता दिखता है. वीडियो में कुछ लोग युवक को थप्पड़ मारते दिखाई देते हैं. इस दौरान 'जय श्री राम' के नारे भी सुनाई देते हैं.
वीडियो में कम से कम दो बार पुलिसकर्मी मौके पर दिखाई देते हैं. हालांकि वीडियो में भीड़ को युवक के साथ मारपीट जारी रखते हुए देखा जा सकता है.
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी.
पुलिस के अनुसार घटना 10 मई की है. पुलिस ने बताया कि एक मुस्लिम युवक और हिंदू युवती साथ में होटल में थे. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक युवती ने बताया था कि वह युवक के साथ अपनी मर्ज़ी से होटल गई थी.
भीड़ में शामिल कुछ लोग इसे 'लव जिहाद' कह रहे थे. 'लव जिहाद' ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल कुछ दक्षिणपंथी समूह कथित धर्मांतरण के आरोपों के लिए करते हैं. इस शब्द को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस लंबे समय से जारी है.
पुलिस ने यह भी बताया कि शुरुआत में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई थी. लेकिन वीडियो वायरल होने और कई संगठनों की शिकायतों के बाद भोपाल के गोविंदपुरा थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई. एफ़आईआर में मारपीट, गैरकानूनी जमावड़े और धार्मिक भावनाओं से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं.
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने घटना के तीन दिन बाद बुधवार 13 मई को पत्रकारों से कहा, "मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, सात अन्य लोगों को नामज़द किया गया है और बाक़ी अभियुक्तों की तलाश के लिए टीमें बनाई गई हैं."
होटल में घुसकर युवक को बाहर लाया गया
वायरल वीडियो में कुछ युवक एक होटल के कमरे के अंदर घुसकर युवक को घेरकर बैठे दिख रहे हैं. वीडियो में कुछ लोग युवती को कमरे से बाहर आने के लिए कहते भी सुनाई देते हैं.
इसके बाद युवक को होटल से बाहर लाया जाता है. वीडियो में इस दौरान कुछ लोग बजरंग दल से जुड़े नारे लगाते सुनाई देते हैं.
हालांकि विश्व हिंदू परिषद के मध्य भारत प्रांत के सहमंत्री जितेंद्र चौहान ने बीबीसी से कहा कि घटना में शामिल लोग पहले बजरंग दल से जुड़े थे लेकिन पिछले कुछ समय से उनका संगठन से कोई संबंध नहीं है.
जितेंद्र चौहान ने कहा, "वह लड़के पहले बजरंग दल से जुड़े थे लेकिन पिछले एक साल में उनका हमसे कोई लेना-देना नहीं है. रही बात बजरंग दल से जुड़े नारे लगाने की तो अब कई लोग खुद को इससे जोड़कर नारे लगाते हैं."
घटना के समय मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गौतम नगर इलाके में युवक के साथ कई बार मारपीट की गई.
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "यहां ज़्यादातर स्टूडेंट्स रहते हैं और यह पूरी तरह रिहायशी इलाका है. हम लोग अपने दोस्तों के साथ बैठे थे कि अचानक भीड़ एक लड़के को मारते हुए गौतम नगर चौक की तरफ बढ़ी."
उन्होंने कहा, "भीड़ में कुछ लोग और लोगों को बुला रहे थे. इसके बाद युवक को अलग-अलग तरीकों से अपमानित किया गया. वहां पुलिस भी मौजूद थी लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं हो पाई."
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि, "घटना के वक़्त पहले कम लोग ही हिंसा और मारपीट में शामिल थे लेकिन फिर धीरे-धीरे और लोगों को बुलाया गया. कई दुकानों के लोग भी हिंसा में शामिल होने पहुंच गए थे".
'सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश'
इस मामले में अलग-अलग संगठनों ने पुलिस को शिकायतें दी हैं, जिनमें घटना को सांप्रदायिक हिंसा और भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने का मामला बताया गया है.
एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स की मध्य प्रदेश इकाई ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि कुछ लोग, 'जो स्वयं को बजरंग दल से जुड़ा बता रहे थे', होटल में घुसे और युवक के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की.
शिकायत में कहा गया है कि युवक का वीडियो बनाकर उसे अपमानित किया गया और धार्मिक टिप्पणियां की गईं.
संगठन ने अपनी शिकायत में कहा कि यह घटना 'मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला' कृत्य है और इससे 'सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने' की कोशिश हुई.
इस मामले में मसाजिद कमेटी भोपाल के अंतर्गत चल रहे दारुल क़ज़ा और दारुल इफ़्ता की ओर से भी पुलिस को शिकायत दी गई है.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि युवक को 'मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित' किया गया और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी दी गई.
गोविंदपुरा थाना प्रभारी अवधेश सिंह तोमर ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि शुरुआत में युवती और युवक की ओर से शिकायत नहीं दी गई थी.
पुलिस के मुताबिक बाद में समुदाय के लोगों और संगठनों की शिकायतों के बाद मामला दर्ज किया गया.
पुलिस ने यह भी कहा है कि युवक के ख़िलाफ़ पहले से धोखाधड़ी और चोरी सहित कई मामले दर्ज हैं और कुछ मामले अदालत में लंबित हैं.
मध्य प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून
इस घटना के खिलाफ शिकायत करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के भोपाल इकाई के कोऑर्डिनेटर अनवर पठान ने बीबीसी से कहा कि इस घटना का मुस्लिम समुदाय के बीच नकारात्मक असर पड़ा है.
अनवर पठान ने कहा, "देखिए यह घटना बहुत दुखद है. पुलिस की मौजूदगी में एक दक्षिणपंथी दल के लोग एक होटल में जबरदस्ती घुसकर एक युवक के साथ मारपीट करते हैं. लव जिहाद जैसे गैर-कानूनी नैरेटिव की आड़ में धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश करते हैं. यह कई मायनों में ग़लत है".
उन्होंने आगे कहा कि, "उस दौरान कुछ युवक अल्लाह के नाम को भी बेअदबी से लेते हैं. ऐसे मामलों में हम सरकार और प्रशासन से राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत कारवाई की मांग कर रहे हैं ताकि भोपाल जैसे शहर की फिज़ा बिगाड़ने का प्रयास करने वालों पर अंकुश लग सके."
मध्य प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून पहले से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहे हैं.
प्रदेश में साल 2020 में धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश लागू किया गया था, जिसे बाद में मार्च 2021 में विधानसभा से पारित होने के बाद मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 का रूप दिया गया.
राज्य सरकार ने कहा था कि इसका उद्देश्य जबरन धर्म परिवर्तन और शादी या कथित कपटपूर्ण तरीकों से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है.
क़ानून में ऐसे मामलों में अधिकतम 10 साल की सज़ा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया था.
राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2020 से जुलाई 2025 के बीच मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत 283 मामले दर्ज किए गए.
इनमें सबसे ज़्यादा मामले इंदौर में दर्ज हुए जबकि भोपाल दूसरे स्थान पर था.
कुल 283 मामलों में से 197 मामले, यानी क़रीब 70 प्रतिशत, अलग-अलग अदालतों में लंबित थे.
वहीं जिन 86 मामलों में सुनवाई पूरी हुई या समझौता हुआ, उनमें 50 मामलों में अभियुक्त बरी हो गए जबकि सात मामलों में दोष सिद्धि हुई. बाकी मामलों में शिकायत वापस लेने, समझौते या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के तहत निपटारा हुआ.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित. (bbc.com/hindi)


