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बर्लिन, 13 मई. जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी BfV ने प्रो-फिलिस्तीनी प्रदर्शनों पर नजर रखने की अपनी नीति और सख्त कर दी है। एजेंसी ने अब “From the river to the sea, Palestine will be free” नारे को चरमपंथी और यहूदियों-विरोधी (antisemitic) करार दे दिया है।
BfV ने हाल ही में जारी अपनी नई रिपोर्ट और दिशा-निर्देशों में यह भी कहा है कि तरबूज का प्रतीक, जब इसे फिलिस्तीन के नक्शे या फिलिस्तीनी झंडे के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो उसे भी चरमपंथी गतिविधि का संकेत माना जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
BfV का तर्क है कि “नदी से समुद्र तक” नारा इजरायल के अस्तित्व को नकारता है और हमास जैसी संगठनों की विचारधारा से जुड़ा है। जर्मनी में 7 अक्टूबर 2023 के बाद प्रो-फिलिस्तीनी प्रदर्शनों पर सख्ती बढ़ाई गई थी। कई शहरों में इस नारे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अब BfV ने इसे औपचारिक रूप से अपनी निगरानी सूची में शामिल कर लिया है।
तरबूज प्रतीक की वजह यह है कि इसका रंग (हरा, सफेद, लाल, काला) फिलिस्तीनी झंडे से मिलता है। जब फिलिस्तीनी झंडा प्रदर्शनों में प्रतिबंधित किया गया, तो प्रदर्शनकारी तरबूज का इस्तेमाल करने लगे। अब BfV ने इसे भी संदिग्ध प्रतीक मान लिया है।
अन्य यूरोपीय देशों की स्थिति
फ्रांस: “From the river to the sea” नारे पर कई प्रदर्शनों को प्रतिबंधित किया गया है। कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
ऑस्ट्रिया: वियना पुलिस ने इस नारे वाले प्रदर्शनों को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था।
यूनाइटेड किंगडम: नारा विवादास्पद माना जाता है, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। कुछ विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाती।
जर्मनी इस मामले में सबसे सख्त रुख अपनाने वाला यूरोपीय देश माना जा रहा है।
BfV का यह कदम जर्मनी में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच चल रहे विवाद को और तीखा बनाता है। आलोचक इसे “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अतिक्रमण” बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे यहूदियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मानते हैं।
स्रोत: BfV की हालिया रिपोर्ट्स, EuroJewish Congress, और प्रमुख जर्मन मीडिया (मई 2026)।


