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सेप्टिक टैंक सफाई के लिए आनलाइन डैशबोर्ड प्रोटोटाइप शुरू
04-May-2026 8:57 PM
सेप्टिक टैंक सफाई के लिए आनलाइन डैशबोर्ड प्रोटोटाइप शुरू

देश का पहला निगम होने का दावा 

रायपुर, 4 मई। रामकृष्ण केयर हादसे के महीनों बाद निगम ने Faecal Sludge and Septage Management (FSSM) मॉड्यूल के लिए विकसित UPYOG आधारित डैशबोर्ड प्रोटोटाइप का आज से औपचारिक शुरुआत की । यह डैशबोर्ड  राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के अंतर्गत विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य शहरी स्वच्छता सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं पूर्णतः डिजिटल बनाना है।

यह नवाचार आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय  के मार्गदर्शन में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स , यूनिसेफ एवं इनटिट  के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है। इसे देश में पहली बार  निगम द्वारा लागू किया जा रहा है। जो डिजिटल शहरी शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

लॉन्च समारोह में  केंद्रीय संयुक्त सचिव प्रवीर कुमार, तथा  राघवेन्द्र सिंह,  सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता  महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने की। इस अवसर पर एम‌आईसी  सदस्य (स्वास्थ्य) श्रीमती गायत्री चंद्राकर, आयुक्त  विश्वदीप , अपर आयुक्त  विनोद पांडे एवं  अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

UPYOG आधारित यह डैशबोर्ड सेप्टिक टैंक डिस्लजिंग, परिवहन, उपचार एवं सुरक्षित निपटान की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर निगरानी, डेटा विश्लेषण एवं बेहतर निर्णय निर्माण में सहायक होगा। 

इस UPYOG आधारित FSSM डैशबोर्ड के संचालन से सफाईमित्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, नागरिकों को बेहतर सेवाएँ मिलेंगी तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता में वृद्धि होगी। अब नागरिकों को अपने मकान के सेप्टिक टैंक खाली करवाने हेतु नगर पालिक निगम रायपुर के ज़ोन कार्यालय में स्वयं जाकर रसीद कटवाने की आवश्यकता नहीं होगी।

डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पूरी प्रक्रिया में कम समय लगेगा, जिससे नागरिक सरल, सुगम और त्वरित तरीके से सेप्टिक टैंक की सफाई सेवाएँ प्राप्त कर सकेंगे। नागरिक केवल नगर पालिक निगम रायपुर की वेबसाइट में ऑनलाइन सैप्टिक टैंक क्लीनिंग पर जाकर अपनी प्रॉपर्टी आईडी अथवा मोबाइल नंबर के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिससे सेवा की मांग से लेकर निष्पादन तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ट्रैक करने योग्य होगी।
यह सुविधा न केवल नागरिकों के लिए सहूलियतपूर्ण है, बल्कि शहरी स्वच्छता व्यवस्था को अधिक सक्षम, सुरक्षित और जवाबदेह भी बनाएगी।


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