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11 तक ईओडब्ल्यू की रिमांड पर
रायपुर, 4 मई। आबकारी निगम के ओवर टाइम भुगतान घोटाले में ईओडब्ल्यू ने आज 7 और लोगों को गिरफ्तार किया है। निगम में 2019-20 से 23-24 के बीच 115 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया था। इनमें मैन पावर सप्लाई कंपनी के 7 संचालक और प्रतिनिधि शामिल हैं।
ईओडब्ल्यू ने एक बयान में कहा कि विवेचना में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया कि ओवर टाइम भुगतान के नाम पर फर्जी एवं बढ़े हुए बिल तैयार कर राशि का आहरण किया गया।
उक्त राशि का उपयोग कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान करने के बजाय CSMCL के अधिकारियों एवं प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया जाना पाया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में (1) नीरज कुमार चौधरी, वित्त एवं कर सलाहकार (सी.ए.), ईगल इंटर साल्युशन लिमिटेड एवं अलर्ट कमाण्डोंज प्रायवेट लिमिटेड, (2) अजय लोहिया, डायरेक्टर, अलर्ट कमाण्डोंज प्रायवेट लिमिटेड, (3) अजीत दरंदले, डायरेक्टर, सुमीत फैसीलिटिज कंपनी, (4) अमित प्रभाकर सालुंके, डायरेक्टर, सुमीत फैसीलिटिज लिमिटेड, (5) अमित मित्तल, चेयरमेन एवं डायरेक्टर, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड कंपनी, (6) राजीव द्विवेदी, डायरेक्टर, प्राईमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड एवं (7) संजीव जैन, डायरेक्टर, प्राईमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय 29 नवंबर 23 को 03 व्यक्तियों से नगद ₹28.80 लाख जब्त कर आवश्यक कार्यवाही हेतु छत्तीसगढ़ शासन को सूचना प्रेपित की गई थी, जिसके आधार पर ब्यूरो में प्रथम सूचना पत्र दर्ज किया गया था।
विवेचना में पाया गया कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवर टाइम के नाम पर उक्त मैन पावर एजेंसियों को लगभग ₹115 करोड़ का भुगतान किया गया। उक्त रकम मैन पावर एजेंसियों द्वारा अपने कर्मचारियों को भुगतान की जानी थी,
[5/4, 20:03] Laleeta Kanker: आहरण कर उसका उपयोग CSMCL के अधिकारियों एवं प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया जाता था। इस राशि का बड़ा हिस्सा कंपनियां स्वयं अपने पास रखती थीं।
विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया है कि संबंधित मैन पावर एजेंसियों द्वारा ओवर टाइम कार्य के नाम पर प्रस्तुत बिलों में वास्तविक कार्य, कर्मचारियों की उपस्थिति एवं भुगतान की स्थिति के अनुरूप पारदर्शिता नहीं रखी गई। प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि ओवर टाइम भुगतान की आड़ में फर्जी एवं बढ़े हुए बिल प्रस्तुत कर शासकीय राशि का अनियमित आहरण किया गया, जिससे शासन को गंभीर आर्थिक क्षति होना परिलक्षित होता है।
अब तक की विवेचना में यह भी पाया गया है कि ओवर टाइम भुगतान के नाम पर प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों को भुगतान करने के बजाय मैन पावर एजेंसियों के संचालकों, संबंधित अधिकारियों एवं अन्य प्राइवेट व्यक्तियों के बीच कमीशन के रूप में वितरित किया जाता था। इस प्रकार शासकीय भुगतान प्रक्रिया का दुरुपयोग कर एक संगठित आर्थिक अपराध को अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार सभी आरोपियों को आज विशेप न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर 11 मई तक पुलिस रिमाण्ड प्राप्त किया गया है। पुलिस रिमाण्ड अवधि में आरोपियों से फर्जी बिलिंग, अवैध कमीशन वितरण, राशि के अंतिम उपयोग, लाभार्थियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जाएगी। आरोपियों से पूछताछ में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। प्रकरण में अग्रिम विवेचना जारी है।


