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बिलासपुर में भारी मात्रा में सोना-नकदी बरामद, दुर्ग-भिलाई में भी छापे-फरार आरोपी ‘सुब्बू’ की तलाश
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 1 मई। छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और भारतमाला परियोजना से जुड़े मामलों की जांच तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई में एक साथ बड़ी कार्रवाई की। तड़के शुरू हुई यह कार्रवाई देर रात तक जारी रही, जिसमें कई कारोबारियों, नेताओं और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर सघन जांच की गई।
बिलासपुर में ईडी की टीम ने फरार आरोपी विकास अग्रवाल के भाई विवेक अग्रवाल के घर और प्रतिष्ठानों पर छापा मारा। इस दौरान 17 किलो सोना, हीरे के हार और बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। टीम ने घर के सभी प्रवेश द्वार सील कर दिए और सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए। अंदर दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच की गई।
अग्रवाल के निवास के साथ-साथ सदर बाजार के श्री राम ज्वेलर्स में भी ईडी ने रिकॉर्ड खंगाले। यहां निवेश, खरीद-बिक्री और स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की गई।
जांच एजेंसी को संदेह है कि फरार विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू के वित्तीय लेन-देन और निवेश से जुड़े अहम सुराग विवेक अग्रवाल के कारोबार में छिपे हो सकते हैं। सुब्बू पिछले चार वर्षों से फरार है और अदालत उसे वांछित घोषित कर चुकी है।
दूसरी ओर दुर्ग में ईडी ने भाजपा नेता और कारोबारी चतुर्भुज राठी के घर और दफ्तर पर दबिश दी। उनकी कंपनियों इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोल माइनिंग और निर्माण से जुड़ी इकाइयों के वित्तीय दस्तावेजों की जांच की गई। बताया जा रहा है कि इन कंपनियों का संबंध सरकारी परियोजनाओं से है।
भिलाई में भी टीम ने कारोबारी गोविंद मंडल के घर और फैक्ट्री में कई घंटे तक जांच की। हालांकि मंडल का कहना है कि टीम उनके यहां गलती से पहुंची थी और उसे किसी अन्य स्थान पर जाना था।
ईडी की यह पूरी कार्रवाई शराब घोटाले के कथित सिंडिकेट और भारतमाला सड़क परियोजना में हुए मुआवजा घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है। भारतमाला परियोजना में जमीन अधिग्रहण के नाम पर करीब 43 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें फर्जी दस्तावेज बनाकर राशि बढ़ाकर दिखाई गई।
इस मामले में पहले ही कई अफसरों पर कार्रवाई हो चुकी है। कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया जा चुका है, जबकि जगदलपुर के नगर निगम आयुक्त निर्भय साहू पर भी कार्रवाई हुई थी। कुल मिलाकर पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं।


